इंटरनेट ऑफ़ थिंग्स क्या है और कैसे काम करता है?

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इन्टरनेट ऑफ़ थिंग्स (IoT) क्या है?

IoT का फुल फॉर्म इंटरनेट ऑफ थिंग्स (IoT) है। यह एक ऐसी अवधारणा है जो यह इंगित करता है कि कैसी होगी अगर दुनिया की सारी चीजों (भौतिक वस्तुओं) जिसे की दैनिक इस्तमाल में लाया जाता है अगर इंटरनेट से कनेक्ट हो जाएँ तब। इस इंटरनेट ऑफ थिंग्स में यह सभी जुड़े हुए उपकरणों को एक दुसरे को पहचान कर करना चाहिए जो की इंटरनेट के साथ जुड़े हुए हैं।

इंटरनेट ऑफ़ थिंग्स (IoT) एक ऐसी अवधारणा है जहाँ कुछ चीज़ें (चीज़ें) एक दुसरे के साथ बातचीत कर सकती हैं या फिर दुसरे उपकरणों के साथ बात कर सकती हैं।

इंटरनेट ऑफ थिंग्स के उदहारण

सोच लें के आप सुबह के समय में अपने खटिये पर लेटे हुए हैं और आपको नींद भी आ गयी है।
इतने में आपके हाथों में स्तिथ सेंसर को आपके दिल की धड़कन में कुछ असामान्य लगता है, सासें बढ़ने लगती है, आपके व्यवहार में भी काफी बदलाव आता है। इसलिए आपको धीरे से उठाने के बदले में ये यन्त्र बड़े जोरों से कंपन करने लगते हैं जिससे आपका ध्यान आकर्षित होता है और आकर्षित होना चाहिए। इतने में आपकी नींद टूट जाती है और आप अपनी छाती को पकड़कर वहीँ अपने शरीर को सीधा करने की कोशिश करते हैं। इतने में आपको ये पता नहीं चलता है कि आपके साथ क्या हो रहा है और आप अपने फोन के पक्ष में बढ़ रहे हैं।

जैसे की आप मोबाइल की स्क्रीन खोलते हैं आप वहाँ पर एक संदेश दिखाई पड़ता है जो कि ये लिखा होता है की आपका रक्तचाप उच्च हो गया है और इसके साथ आपको दो एस्पिरिन लेने की सलाह भी देता है। इतना ही नहीं बल्कि इसके साथ वह आपके सभी संकेतों को रिकॉर्ड भी कर लेता है और उन्हें आपके डॉक्टर के पास भेज देता है।

वहाँ अस्पतालों में डॉक्टर आपके डेटा को मूल्यांकन कर रहे होते हैं और उनके अवलोकन के बाद उन्हें लगता है कि आपको अस्पताल में तुरंत आ जाना चाहिए और इसके लिए वे इलेक्ट्रॉनिक रूप से एक आपातकालीन चिकित्सा टीम भी भेजते हैं जिनके पास आपकी स्वास्थ्य स्थिति के पूरे डेटा में मेहज़ुद हैं। होता है और आपके घर के पते का भी। जैसे ही वे आपके घर के निकट होते हैं, आपको उनके आने का संदेश भी आता है। तुरंत ही वे आपको अस्पताल में भर्ती होने के लिए ले जाते हैं।

जब डॉक्टर आपके पास आते हैं तो आपको एक खुश खबरी देते हैं की आपकी सेहत अब पहले से बेहतर है और आपको चिंता करने की कोई भी जरूरत नहीं है। आपको एक गंभीर दिल का दौरा पड़ा था लेकिन समय में उपचार होने के कारण एक बड़ी परेशानी हो सकती थी पहले ही रोक लिया गया था।

किसने ये हालात का रखा था अवधि इंटरनेट?

सन 1999 में एक वैज्ञानिक जिसका नाम केविन एश्टन था, इस अवधारणा का पहला नाम ‘इंटरनेट ऑफ थिंग्स’ था। तब वे पी एंड जी (जो बाद में एमआईटी के ऑटो-आईडी सेंटर बना) में काम किया करते थे। ये केवल एक नया शब्द था, लेकिन इसका संचालन नया नहीं था। उनके संचालन में जो तकनीक इस्तमाल में लाई जाती हैं जैसे की व्यापक कंप्यूटिंग, ubicomp और परिवेशी बुद्धिमत्ता इस सब की जानकारी पहले से ही लोगों को थी।

कोन कोन से उपकरण IoT का हिस्सा बन सकते हैं?

कोई भी उपकरण, अगर वहाँ पर और बंद की स्विच हो तब मौके हैं की वो IoT का हिस्सा बन सकते हैं। आम तोर से ये देखा गया है की जुड़े उपकरणों के वरीयता तोर से I.P पता होते हैं। समान इंटरनेट प्रोटोकॉल संस्करण 6 (IPv6), के होने से उन उपकरणों में IP पता को असाइन करना बहुत ही आसान हो गया है। क्यूंकि इसकी मदद से अनगिनत उपकरणों के साथ कनेक्ट किया जा सकता है।
ऐसी चीजें जिन्हें आप इंटरनेट के साथ कनेक्ट कर सकते हैं:

  • कनेक्टेड वेयरबल्स – स्मार्टवॉच, स्मार्ट ग्लास, फिटनेस बैंड आदि।
  • कनेक्टेड होम्स – इसमें ऐसे उपकरण शामिल हैं, जिन्हें हम घर पर इस्तमाल करते हैं।
  • कनेक्टेड कारें – वाहन जो की इंटरनेट के साथ कनेक्ट हो सकते हैं।
  • कनेक्टेड सिटीज़ – स्मार्ट मीटर जो की आसानी से ये विश्लेषण कर सकते हैं वे हैं पानी, गैस, बिजली के उपयोग को

हमें इंटरनेट ऑफ थिंग्स क्यूं चाहिए?

  • आपके शारीरिक और मानसिक स्वास्थ्य के लिए सर्वोत्तम संभव फीडबैक प्रदान करता है।
  • वास्तविक समय की निगरानी में सर्वोत्तम संभव संसाधन आवंटन प्रदान करता है।
  • गतिशीलता पैटर्न में सबसे अच्छा संभव निर्णय लेने प्रदान करता है।
  • इसके साथ स्थानीय प्रदाताओं को सबसे अच्छा संभव कनेक्शन प्रदान करता है जिनकी वैश्विक क्षमता है

IoT के मुख्य अवसर और लाभ क्या हैं।

IoT हमें ऐसा अवसर प्रदान करता है जिससे हम अपने काम को अधिक कुशलता से कर सकें जिससे हमारी समय की बचत हो, और उसके साथ पैसों की भी। वहीँ हमारा काम भी आसानी से हो जाए।

इंटरनेट ऑफ थिंग्स हमें हमरे दैनिक के मुद्दों को समाधान करने में मदद करता है – जैसे की एक व्यस्त क्षेत्र में अपनी कार के लिए पार्किंग स्थान खोजने, अपने घर मनोरंजन प्रणाली को लिंक करने और फ्रिज के वेब कैमरा से ये चेक करें की हमें और दूध चाहिए या नहीं।

1. अभूतपूर्व कनेक्टिविटी का होना: IoT के डेटा और इनसाइट्स की मदद से उद्योग को ये मालूम पड़ता है कि उनके उपभोक्ताओं को किस प्रकार की डिवाइस चाहिए और किस प्रकार की सेवा जिससे वह और भी बेहतर नवीन नए उत्पाद प्रदान कर सकें, इसके साथ वे। अपने प्रतिद्वंद्वियों की तुलना में बहुत अच्छी सेवाएं प्रदान करेंगे।

2. बढ़ी हुई क्षमता: जैसे की हम जानते हैं कि networks IoT नेटवर्क बहुत ही स्मार्ट और बुद्धिमान होते हैं जो की वास्तविक समय डेटा कर्मचारियों को प्रदान करते हैं, जिसमें ऐसी जानकारी भी होती है जिससे दिन-प्रतिदिन की दक्षता और उत्पादकता होती है। अनुकूलित किया जा सकता है।

3. लागत बचत: IoT डिवाइस बहुत ही सटीक डेटा प्रदान करते हैं और संगठन को स्वचालित वर्कफ़्लोज़ भी प्रदान करते हैं, जिससे उनकी परिचालन लागत और त्रुटियां कम से कम होनी चाहिए।

4. समय की बचत: स्मार्ट डिवाइस के कनेक्ट हो जाने से वे अलग-अलग संगठनों को सिस्टम और प्रक्रियाओं को बढ़ाने में मदद करते हैं, जिन्हें उनकी बहुत समय की बचत होती है।

IoT के मुख्य खतरे और चुनौतियां क्या हैं।

ये तो हमें भी स्पष्ट रूप से दिखाई पड़ रहा है की प्रौद्योगिकी बड़ी जल्द ही तरक्की कर रही है। ऐसे में अगर यह सही समय में नियंत्रण नहीं किया गया तो ये हमारे लिए भविष्य में बड़ी बड़ी मुश्किलें ला सकता है।
7 बिलियन से बहुत अधिक डिवाइस अब बहुत सुरक्षित नहीं है और इसे 2020 से पहले सुरक्षित बनाना होगा। इससे इस बात की गंभीरता का अनुमान लगाया जा सकता है।

एक उदहारण के लिए IoT botnets, जिन्हें की नेटवर्क को प्रबंधित करने के लिए तैयार किया गया था। लेकिन समय के साथ साथ उन्हें और अद्यतन नहीं किया गया है जिसके कारण बहुत से बड़ी वेबसाइटें और सेवाएं 2016 में ऑफ़लाइन हो गई हैं। परिणामस्वरुप लोगों को बहुत से मुश्किलों का सामना करना पड़ा।
सभी चीजें जो की इंटरनेट से जुड़ी हो उन्हें हैक किया जा सकता है, ऐसे में IoT भी शामिल है। ऐसे बहुत से दृश्यों को आप लोगों ने फिल्मों में देखा होगा जहाँ पर हैकर्स कैसे ऑनलाइन बहुत से साइटों को हैक कर लेते हैं।

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