स्कूल फोबिया क्या है? (School Phobia in hindi)

School Phobia in hindi

स्कूल  ऐसी जगह है, जहां हर बच्चे को पहली बार जाने में डर लगता है। पर कुछ बच्चों का तो स्कूल के नाम से ही हाथ-पांव फूल जाते हैं। पेट दर्द, सिर दर्द व बुखार जैसे बहानों के जरिये वे स्कूल से दूर भागने की कोशिश करते हैं। यदि बच्चा स्कूल के नाम से ही कांप जाए या रोने लगे तो इसके पीछे कुछ तो वजह होगी और यह जानना माता-पिता का कर्तव्य है। क्या पता आपके बच्चे के मन में किसी बात का डर बैठा हो, जिससे वह स्कूल जाने से भाग रहा है। अगर आपका बच्चा भी ऐसा करता है तो सचेत हो जाइए, क्योंकि ये लक्षण स्कूल फोबिया के भी हो सकते हैं।

 स्कूल फोबिया क्या है? (What is school phobia?)

जब बच्चा पहली बार घर से निकलकर स्कूल की दहलीज पर कदम रखता है तो उसके लिए यह एक अलग ही अनुभव होता है। स्कूल से लेकर, साथी, शिक्षक सब कुछ उसके लिए नया- नया सा होता है। जहां कुछ बच्चे स्कूल के माहौल में जल्दी ही घुलमिल जाते हैं, वही कुछ बच्चों को नए माहौल में घुलने में समय लगता है। अगर आप अपने आसपास नजर डालेंगी, तो आपको बड़ी तादाद में ऐसे बच्चे मिल जाएंगे जो स्कूल जाने में या तो ना-नुकुर करते हैं या फिर स्कूल के नाम से ही घबरा जाते हैं। स्कूल जाने के डर से कई बच्चों को बुखार, दस्त, उल्टी तक होने लगती है। मेडिकल की भाषा में इसे स्कूल फोबिया कहते हैं। 6 से 15 साल के बच्चे इसके शिकार होते हैं।

स्कूल फोबिया के लक्षण क्या है? (What are the symptoms of school phobia?)

स्कूल फोबिया बढ़ने से बच्चों के व्यवहार में अप्रत्याशित बदलाव आता है, जिससे उनमें चिड़चिड़ापन बढ़ जाता है। बात- बात पर गुस्सा आना और किसी काम में मन नहीं लगना इसके लक्षण हो सकते हैं। इस कारण उनकी शारीरिक एवं मानसिक क्षमता का भी ह्रास होता है। शारीरिक दुर्बलता के साथ-साथ वे अनिद्रा के शिकार भी हो जाते हैं। ऐसी अवस्था में बच्चों को भूख भी नहीं लगती है। इसके अलावा इस बीमारी से वजन में कमी होना, पेट खराब होना जैसी समस्याएं भी हो जाती हैं।

कैसे निपटें इस समस्या से। (How to deal with this problem)

मनोचिकित्सक डॉक्टर बिंदा सिंह का कहना है कि बच्चों में भावनात्मक तनाव से उन्हें स्कूल फोबिया या किसी तरह का फोबिया हो सकता है। स्कूल में बच्चों का दोस्तों से अच्छा रिश्ता न बनना या टीचर का डांटना या कभी-कभी घर में अच्छा वातावरण ना होने के कारण भी उन्हें स्कूल फोबिया होने लगता है। इसके लिए जरूरी है कि बच्चों के इन लक्षणों को शुरुआती दौर में ही पकड़ा जाए ताकि बच्चों का डर ज्यादा न बढ़े। स्कूल फोबिया होने पर बच्चों के साथ-साथ माता-पिता को भी काउंसलिंग करानी चाहिए। ऐसी काउंसलिंग में डॉक्टर बेहेवियर थेरेपी के जरिये समस्या का निदान करते हैं। वहीं, इन सारे परेशानियों से बच्चे को बाहर निकालने में माता-पिता की भी अहम भूमिका है। माता-पिता को बच्चों को स्कूल के बारे में सकारात्मक बातें बतानी चाहिए, ताकि स्कूल जाने के प्रति उनका रुझान बढ़े। बच्चों का ज्यादा-से-ज्यादा समय दें। परेशानी के लक्षण नजर आने पर टीचर से भी बात करें।

डर फोबिया क्या होते है। (What are fear phobias)

    • माता-पिता से दूर रहने का डर
    • पेरंट्स की उम्मीदों का अनावश्यक दबाव
    • स्कूल में टीचर की डांट खाने का डर
    • होमवर्क न करने पर मिलने वाली सजा का डर
    • दूसरे बच्चों की तुलना में कम महत्व मिलना
    • बच्चों के बीच मतभेद
    • हीन भावना
SHARE