LiFi क्या है? LiFi कैसे काम करता है।

what is LiFi in hindi

आप जरा गौर करते हैं कि ये दो समोंस एक वाईफाई और दूसरा मोबाइल नेटवर्क है। आप यह सोच रहे होंगे कि इंटरनेट की गति के मामले में वाईफाई से टकराव देने वाला कोई नहीं है। किंतु आपकी यही सोच अभी से बदल गई है। क्योंकि आब एक नई तकनीक आचुकी है। जो wifi से कई गुना तेज़ है जिसका नाम LiFi है। इसको इस्तमाल करने के लिए आपको एक एलईडी बल्ब की आवश्यकता है।

LiFi जिसका पूरा नाम लाइट फिडेलिटी है। यह एक हाई स्पीड ऑप्टिकल वायरलेस टेक्नोलॉजी है। इस LiFi तकनीक में विजिबल लाइट (LED बल्ब से निकलने वाली रोशनी) का इस्तमाल डिजिटल सूचना ट्रांसमिशन में किया जाता है। जैसे की आपको पता होगा यह Technology WiFi से मिलती है जुलती है। वैसे तो दोनों WiFi और LiFi में काफी अंतर है। दोनों सामान इसीलिए हैं क्यूंकि दोनों वायरलेस तरीके से सूचना को साझा करते हैं।

वाईफाई रेडियो तरंगों से डेटा ट्रांसमिशन करता है, तो दूसरी तरफ LiFi विज़िबल लाइट कम्युनिकेशन का इस्तमाल करता है। लाइट बल्ब (LED) में जो लाइट्स होती है उस लाइट से यह टेक्नोलॉजी टास्क करती है। LiFi दर्शनीय प्रकाश संचार यह एक ऑप्टिकल संचार प्रौद्योगिकी है। जिनमे दृश्यमान प्रकाश किरणों का उपयोग होता है। इन किरणों की रेंज 400-800 Thz है।

इस प्रौद्योगिकी में लाइट के माध्यम से डेटा ट्रांसफर होने के कारण इसकी गति लगभग 224 जीबीपीएस है। जो वाईफाई से लगभग 1000 गुणा ज्यादा है। मतलब यह तकनीक हर जगह उपलब्ध नहीं है वरना आप कुछ सेकंड्स के अंदर, एक एलईडी बल्ब के निचे खड़े हो कर फिल्में, वीडियो डाउनलोड कर रहे हैं। इसका फायदा यह भी है कि इंटरनेट की सेवा आपको मिलेने साथ, आपके कमरे में कभी भी अंधेरा नहीं होगा क्यूंकि जब आप LiFi बल्ब को करोगे तब रोशनी भी निकलेगी और इंटरनेट भी।

LiFi काम कैसे करता है? (How does LiFi work)

जैसे सारे Internet Devices काम करते हैं वैसे ही LiFi भी काम करता है। कैसे काम करता है यह जानने से पहले आपको यह जान लेना चाहिए कि कोन कोन से घटकों का इस्तमाल किया जा रहा है। मुख्य रूप से ये 3 घटक होते हैं।

1. Lamp Driver
2. LED Lamp
3. Photo Dectector

इन तीनो अवयवों के साथ आपको एक और कनेक्शन चाहिए जो हम और आप कहते हैं कि इंटरनेट हैं। पहले से ही मैं आपको एक जानकारी दे चूका हूँ यह लाइट्स के माध्यम से डेटा ट्रांसमिशन करता है।

एलईडी बल्ब के कुछ लक्षण हैं। एलईडी बल्ब में लाइट एमिटिंग डायोड और फ्लोरोसेंट कंपोनेंट के कारण LiFi के लिए यह सही कंपोनेंट है। LiFi के लिए हाई-स्पीड डेटा रेट की वैक्विटी है और LED बल्ब में DATA लाइट की स्पीड से ट्रांसमिट होते हैं। इन एलईडी बल्ब में लाइट इंटेंसिटी काफी तेजी से टर्न रहती है। लाइट कभी ऑन होती है तो कभी ऑफ।

मानव आंखें इन पर और बंद को कभी नहीं ही देख सकते हैं। किंतु फोटो डिटेक्टर को यह सब दिखाई देता है। इन सभी वजहों के कारण एलईडी बल्ब सबसे सही है। LiFi की कार्य प्रणाली को समझने के लिए आपको एलईडी को समझना जरुरी था।

LiFi का इतिहास (History of LiFi)

प्रो। हैराल्ड हास, वो यूके के यूनिवर्सिटी ऑफ़ एडिनबर्ग के थे। जिनको LiFi टेक्नोलॉजी का फाउंडर भी बताया गया है। अपने आविष्कार को वे टेक टॉक में प्रतिनिधित्व करते थे। हैराल्ड हास प्योर लीफ़ि के सह-संस्थापक हैं। जिनकी सोच से ही आज हम LiFi Technology को भविष्यत में इस्तमाल कर सकते हैं।

हैराल्ड हास के मुताबिक अगर कोई भी सूचना को देखने योग्य लाइट पोर्टियन के माध्यम से भेजा जाए। तो उसे दर्शनीय प्रकाश संचार (VLC) कहा जाता है। हैराल्ड हास ने एक डी-लाइट प्रोजेक्ट को शुरू किया। 2010 से 2012 तक इस नेटवर्केक्ट को काफी समय हो चुका था जब वे एडिनबर्ग के संस्थान में थे। काफी समय से इस परियोजना के उपर ठहराने के बाद। 2011 में TED ग्लोबल टॉक के दौरान LiFi Technology को लोगों के सामने और आगजनी के लिए किया गया था। इसके बाद लोग इस टेक्नोलॉजी के बारे में लोग जानने लगे थे। उसी समय के बिना समय गवाए एक कंपनी की शुरूआतवात की गई थी जिसका नाम था प्योरलीफी जो अभी है।

अक्टूबर 2011 में इस कंपनी ने और उद्योग के समूह मिलके LiFi कंसोर्टियम का गठन किया था। दोनों का एक ही उद्देश्य हाई स्पीड वायरलेस सिस्टम का गठन करना था। रेडियो तरंगों में जो सीमा है उन्हें ख़त्म करना। एसी बहुत सारी कंपनियां जो जोई-दिशात्मक VLC उत्पाद बनाने लगी थी, लेकिन वह Li-Fi से काफी भिन थी।

2012 में VLC Technology को LiFi के साथ नएसन किया गया था। अगस्त 2013 के एक आगसन में यह प्रमाणित हो चूका था। इसमें सिंगल कलर LED 1.6 Gbit / sec के साथ Data Transmission हो रहा था। 2013 सितंबर के एक प्रेस में यह बोला गया की LiFi में लाइन ऑफ साइट की कोई आवृति नहीं है। अक्टूबर 2013 के एक रिपोर्ट में यह बतया गया था कि चीनी निर्माताओं ने LiFi किट को विकास में लगे हुए हैं।

अप्रैल 2014 में रूसी कंपनी स्टिंस कोमन ने एक वायरलेस नेटवर्क को विकसित किया जिसका नाम बीमकेस्टर था। फिलहाल इस में डेटा की गति लगभग 1.25 गीगाबाइट प्रति सेकंड है। आगे भविष्यत में LiFi की स्पीड 5 GB / sec होने वाली है। वह छोटा सा लीफाई का इतिहास था।

LiFi के फायदे (Benefits of LiFi)

    1. दक्षता: आपको पता ही होगा कि यह टेक्नोलॉजी विजिबल लाइट टेक्नोलॉजी पे आधारित है। जैसे की आपको पता है कार्यालय और घर में पहले से ही एलईडी बल्ब हैं। एलईडी बल्ब लाइट के अच्छे स्रोत होते हैं। इसी कारण से इनको डेटा ट्रांसमिशन के लिए इस्तमाल किया जा सकता है। यह काफी सस्ता और अच्छा ऊर्जा का स्रोत है। डेटा ट्रांसमिशन के दौरान एलईडी बल्ब को चालू करना अनिवार्य है। अगर आपको लाइट से परेशानी हो रही है तो आप चाहते हैं तो एलईडी बल्ब की रोशनी को कम कर सकते हैं और फिर आप भी इंटरनेट को इस्तमाल कर सकते हैं।
    2. उपलब्धता: जहां भी लाइट सोर्स है वहां इंटरनेट है। आपको हर जगह लाइट बल्ब देख सकते हैं, जैसे की घरों, कार्यालयों, दुकानों, मॉल और विमानों में भी हैं। आपको बोलने का एक ही तत्वार्य है। जहाँ रोशनी की व्यवस्ता है वहाँ आप LiFi का उपयोग कर सकते हैं।
    3. सुरक्षा: इस प्रौद्योगिकी का एक फायदा सुरक्षा है। जैसे की आपको पता है कि हल्की दीवार के दुसरे पार नहीं हो सकते हैं। इसी तरह LiFi का सिग्नल भी एक कमरा से दुसरे कमरे तक सिग्नल ना जाने के कारण LiFi Secure है। बहार का कोई भी उपयोगकर्ता आपके इंटरनेट को एक्सेस नहीं कर सकता है।

LiFi के नुकसान (Disadvantages of LiFi)

1. बिना लाइट सोर्स के आप इंटरनेट एक्सेस नहीं कर सकते। हर बार आपको लाइट को चालू करने की आवश्कता है।
2. एक कमरे के अंदर ही इसे इस्तमाल कर सकते हैं। रेंज लिमिटेड है।
3. यह एक रौशनी होने के कारण दिवार को भेद नहीं सकता है। इसी कारण से इंटरनेट लिमिटेड स्थान पर उपलब्ध है।
4. सनलाइट की वजह से इंटरनेट स्पीड में बाधा होने की संभावना है।
5 .नए LiFi कनेक्शन के लिए अलग-अलग नेटवर्क बनाना पड़ता है।
6. यह काफी महँगी तकनीक है।

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