इंटरनेट क्या है और इसका मालिक कौन है?(What is internet and who owns it?)

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इंटरनेट दुनिया के सबसे बड़े नेटवर्क का नेटवर्क है। यह एक वैश्विक कंप्यूटर नेटवर्क है जो कई प्रकार की सूचना और संचार सुविधाएं प्रदान करता है।

ये मूलतः में एक बहुत बड़ा जाल होता है, परस्पर जुड़े नेटवर्क का और साथ में ये एक दुसरे के साथ जुड़े रहने के लिए मानकीकृत संचार प्रोटोकॉल का इस्तमाल करते हैं।

इसी जाल को इंटरनेट की भाषा में मीडिया या फिर ट्रांसमिशन मीडिया बोला जाता है। वैसे थोड़ी जानकारी और दे देता हूँ ये जाल एक तरह का तार है, जिसमें सूचना और डेटा दुनिया भर में घूमता रहता है। यह डेटा इन सब में से “पाठ, छवि, एमपी 3, वीडियो” कुछ भी हो सकता है ज्यदा तोर पाठ, छवि, एमपी 3, वीडियो इंटरनेट पे सब ढूंडते रहते है।

नेट में डेटा और सूचना, राउटर और सर्वर के जरिए जाना आना होता हैं, राउटर और सर्वर ही दुनिया के सभी कंप्यूटर को जोडके रखते हैं, जब संदेश एक कंप्यूटर से दुसरे कंप्यूटर तक जाता है तो तब एक प्रोटोकॉल काम करता है जिसका नाम आईपी है (इंटरनेट प्रोटोकॉल), प्रोटोकॉल का मतलब “इंटरनेट को चलने के नियम में जिनको प्रोग्रामिंग में लिखा गया है”।

इंटरनेट का फुल फॉर्म होता है, इंटरकनेक्टेड नेटवर्क। जो की मूलतः में एक बहुत ही बड़ा नेटवर्क होता है सभी वेब सर्वर वर्ल्डवाइड का। इसलिए यह बहुत से स्थानों में वर्ल्ड वाइड वेब या बस वेब भी कहा जाता है।

इस नेटवर्क में ऐसे बहुत से निजी और सार्वजनिक संगठनों, स्कूलों और कॉलेजों, अनुसंधान केंद्रों, अस्पतालों के साथ साथ बहुत से सर्वर भी शामिल हैं सूरे दुनिभर में।

इंटरनेट की परिभाषा

इंटरनेट मूल रूप से एक वैश्विक व्यापक क्षेत्र नेटवर्क होता है जो की दुनिया भर के कंप्यूटर सिस्टम को आपस में कनेक्ट करता है। बहुत से उच्च-बैंडविड्थ डेटा लाइनों में होते हैं जो की इंटरनेट का “बैकबोन” कहलाते हैं। इन लाइनों को कनेक्ट किया जाता है प्रमुख इंटरनेट हब के साथ जो की डेटा को वितरित करते हैं, दुसरे स्थानों को, जैसे की वेब सर्वर और ISP आईएसपी हैं।

वहीँ यदि आपको इंटरनेट के साथ कनेक्ट होना है, तो आपके पास एक इंटरनेट सेवा प्रदाता (आईएसपी) का उपयोग होना चाहिए, जो की एक मध्यमान के तरह कार्य करता है आपके और इंटरनेट के बीच में।

ज्यादातर आईएसपी ब्रॉडबैंड इंटरनेट एक्सेस प्रदान करते हैं एक केबल, डीएसएल, या फाइबर कनेक्शन के माध्यम से। जब आप इंटरनेट के साथ कनेक्ट होते हैं तो एक सार्वजनिक वाई-फाई सिग्नल के माध्यम से, यहां पर भी वाई-फाई राउटर एक आईएसपी के साथ जुड़ा होता है, आपको इन्टरनेट प्रदान करने के लिए है।

समान सेलुलर डेटा टावरों को भी किसी न किसी एक इंटरनेट सेवा प्रदाता से जुड़ा होना होता है, इससे जुड़े उपकरण को इंटरनेट एक्सेस प्रदान करने के लिए है।

इंटरनेट की खोज किसने की

इंटरनेट का सूचक कर पाना किसी एक व्यक्ति के बस की बात नहीं थी। इसे बनाने में बहुत से वैज्ञानिक और इंजीनियरों की जरूरत थी। सन 1957 में शीत युद्ध के समय, अमेरिका ने एडवांस्ड रिसर्च प्रोजेक्ट्स एजेंसी (ARPA) की स्थापना की जिसका उद्देश्य एक ऐसी प्रौद्योगिकी को बनाना था, जिससे की एक कंप्यूटर को दूसरे कंप्यूटर से जोड़ा जा सके।
सन 1969 में इस एजेंसी ने अरपानेट की स्थापना की। जिस से कोई भी कंप्यूटर को किसी भी कंप्यूटर से जोड़ा जा सकता था।

सन 1980 तक आते-आते उसका नाम इंटरनेट हो गया। विंटन सेर्फ़ और रॉबर्ट काह्न ने टीसीपी / आईपी प्रोटोकॉल को आविष्कार किया 1970, और 1972 में, वहीँ रे टॉमलिंसन ने सबसे पहले ईमेल नेटवर्क को पेश किया।

इंटरनेट कब शुरू हुआ?

इंटरनेट की शुरुवात 1 जनवरी, 1983 से हुई। जब ARPANET ने 1 जनवरी, 1983 को टीसीपी / आईपी को गोद लिया था, और उसके बाद शोधकर्ताओं ने उन्हें काम शुरू करने का आश्वासन दिया। उस समय उसे “नेटवर्क ऑफ़ नेटवर्क” कहा जाता था, बाद में आज के आधुनिक समय में उसे इंटरनेट के नाम से जाना जाता है।

भारत में इन्टरनेट कब शुरू हुआ था ?

भारत में इंटरनेट सेवा को सार्वजनिक रूप से उपलब्ध कराया गया था 14 अगस्त 1995 को जब इसे लॉन्च किया गया तो यह राज्य के स्वामित्व वाली विद्या निगम लिमिटेड (वीएसएनएल) के अनुसार थी।

इंटरनेट और इंट्रानेट  क्या  है?

इंटरनेट का अर्थ

इंटरनेट एक वैश्विक नेटवर्क होता है जो की एक कनेक्शन स्थापित करता है और बहुत से अलग-अलग कंप्यूटरों को ट्रांसमिशन प्रदान करता है।
ये दोनों वायर्ड और वायरलेस मोड की संचार का इस्तमाल करता है किसी भी प्रकार की जानकारी को प्रेषक और पाने के लिए जैसे की डेटा, ऑडियो, वीडियो इत्यादि। अक्सर डेटा यात्रा में “फ़ाइबर ऑप्टिक केबल” के द्वारा होता है, जिन्हें टेलीफोन कंपनियां स्वयं करती हैं।

अभी के समय में इन्टरनेट का इस्तमाल प्राथमिकता सभी लोग करते हैं सूचना प्राप्त करने के लिए, संचार के लिए, और डेटा स्थानांतरित करने के लिए नेटवर्क में। यह एक सार्वजनिक नेटवर्क होता है जिसका इस्तमाल कर कंप्यूटर आसानी से एक दुसरे के साथ कनेक्ट और रिले कर सकते हैं। यह उपयोगकर्ताओं को एक बहुत ही बढ़िया स्रोत प्रदान करता है सूचना का है।

इंट्रानेट का अर्थ

इंट्रानेट एक भाग होता है इंटरनेट का जो की निजी स्वामित्व में होता है किसी एक संगठन के द्वारा। ये अपने सभी कंप्यूटरों को आपस में जोड़ देता है और उसीँ प्रदान करता है अपने सभी फ़ाइलों और फ़ोल्डरों को नेटवर्क के भीतर ही एक्सेस करता है।
इसके अलावा एक फ़ायरवॉल भी होता है जो की प्रणाली को घेरे हुए होता है, जिससे यह किसी अनधिकृत उपयोगकर्ता को नेटवर्क एक्सेस करने से रोकता है। केवल अधिकृत उपयोगकर्ताओं के पास ही अनुमति होती है इस नेटवर्क को एक्सेस करने का।

वहीँ, इंट्रानेट का इस्तमाल कंप्यूटर को कनेक्ट करने के लिए और डेटा ट्रांसमिट करने के लिए होता है। वह भी एक कंपनी के नेटवर्क के भीतर ही होता है। यह एक सुरक्षित तरीका होता है जिसमें विवरण, सामग्री, और फ़ोल्डर्स साझा करने का क्यूंकि इसमें नेटवर्क बहुत ही सुरक्षित और प्रतिबंधित होता है, संगठन के भीतर ही होता है।

इंटरनेट और इंट्रानेट में क्या अंतर है?

  • जहाँ इंटरनेट प्रदान करता है असीमित जानकारी है जिसे कोई भी देख रहा है और इस्तमाल कर सकता है, वहीँ इंट्रानेट में, डेटा केवल संगठन के भीतर ही प्रसारित होता है।
  • इंटरनेट को एक्सेस हर नो और सभी जगह से कर सकता है, वहीँ इंट्रानेट का इस्तमाल केवल प्रमाणित उपयोगकर्ता ही कर सकते हैं।इंटरनेट को कोई एक एकल या एकाधिक संगठन स्वयं नहीं करते हैं, वहीँ इंट्रानेट एक निजी नेटवर्क होने के कारण से यह एक फर्म या संस्थान के अंतर्गत आता है।
  • इंटरनेट एक सार्वजनिक नेटवर्क हैं इसलिए सभी के लिए उपलब्ध हैं, वहीँ इंट्रानेट एक निजी नेटवर्क होता है इसलिए सभी के लिए उपलब्ध नहीं होता है।
    इंट्रानेट ज्यादा सुरक्षित होता है इंटरनेट की तुलना में।

इंटरनेट कैसे काम करता है

इंटरनेट में कंप्यूटर एक दुसरे के साथ जुड़े होते हैं, छोटे नेटवर्क के माध्यम से होते हैं। वहीँ ये जुड़े नेटवर्क गेटवे के द्वारा इंटरनेट बैकबोन के साथ हैं।
वहीँ सभी कंप्यूटर इंटरनेट पर एक दुसरे के साथ संवाद करते हैं टीसीपी / आईपी के माध्यम से, जो की एक बुनियादी प्रोटोकॉल (यानी नियमों का सेट) होता है इंटरनेट का।
टीसीपी / आईपी (ट्रांसमिशन कंट्रोल प्रोटोकॉल / इंटरनेट प्रोटोकॉल) मैनेज करते हैं इंटरनेट में सभी ट्रांसमिशन हो रहे हैं फिर चाहे वो डेटा / फाइल / डॉक्यूमेंट कुछ भी क्यूं न हो, लेकिन इसे करने के लिए उन्हें डेटा / फाइल / डॉक्यूमेंट्स छोटे भागों में तोडना होता है, जिसे के पैकेट या डेटाग्राम कहा जाता है।

प्रत्येक पैकेट में वास्तविक डेटा का पता भाग स्तिथ होता है, यानी गंतव्य और स्रोत का पता 1500 वर्णों तक होता है।

इंटरनेट का इतिहास (History of Internet)

नेट की इतिहास की बात की जाए तो 1969 में ये दुनिया में अपना पहला कदम रखने चुकता था, और कब और तकनीक के बदलाव से ये आगे बढ़ता गया और अभी बी रुकने का नाम नहीं ले रहा है। थोडा और पता है।

तो चलिए आगे इंटरनेट की इतिहास हिंदी में जानते हैं।

1. इंटरनेट का उद्गम अरपानेट (अग्रिम सुरक्षा परियोजना एजेंसी नेटवर्क) से हुआ था।

2. अरपानेट आमेरिका का रक्षा बिभाग का हिस्सा 1969 में था।

3. स्टार्ट में गुपनिया ख़त कंप्यूटर के जरिये प्रेषक के लिए ये नेटवर्क बनाया गया था इसी का नाम ARPANET था।

4. स्टार्ट में इस बिचार को पांच अमेरिकी विश्वविद्यालय के कंप्यूटर को कनेक्ट करने के लिए ये इस्तेमाल किया गया था। 1972 के दसक तक ये दुनिया के 23 नोड और दुनिया के अलग अलग देशों से जुड़ चूका था जिसका नाम बाद में दिया गया इंटरनेट

5. इससे इस नेटवर्क को निजी नेटवर्क के तोर पर इस्तमाल किया जाता था बाद में ये सब तक पोहंचा गया और साल भर साल इसमें बदलवा आता रहा।

भारत में इंटरनेट का इतिहास

भारत में इंटरनेट पहली बार 15 अगस्त 1995 को इस्तेमाल किया गया था। उस समय की सबसे बड़ी टेलीकॉम कंपनी VSNL (Videsh Sanchar Nigam Limited) ने ये सेवा दी थी।

बड़े बड़े सहरों में नेट को पोहंचाया गया।
1996 रेडिफ़मेल नाम की ईमेल साइट की शुरुवात हुई भारत में।
भरता पहला साइबर कैफ़े 1996 में मुंबई में खुला।
1997 Noukri.com जैसी साइट भारत में बनी, आज हर कोई इसे जनता है।
1999 हिंदिपोर्टल “वेबदुनिया” की शुरूआत हुई।
2000 के दशक तक प्रौद्योगिकी अधिनियम 2000 भारत में लागु हुआ।
याहू इंडिया और एमएसएन इंडिया की भी शुरुआतवात 2000 के दसक में हुई थी।
2001 ऑनलाइन ट्रेन वेबसाइट irctc.in की शुरूआत में हुई थी।

इंटरनेट के प्रकार (Type of internet)

इंटरनेट कनेक्शन कई प्रकार के होते हैं ताकि आप व्यक्तिगत इलेक्ट्रॉनिक डिवाइस को इंटरनेट से जोड़ सकें। ये सभी कनेक्शन विभिन्न हार्डवेयर का उपयोग करते हैं और प्रत्येक में कनेक्शन गति की एक अलग श्रेणी होती है।

जैसे-जैसे तकनीक में बदलाव आ रहे हैं, ऐसे बदलावों को संभालने के लिए तेज इंटरनेट कनेक्शन की जरूरत है। इसलिए मैंने सोचा कि हमें एक ही प्रकार के इंटरनेट कनेक्शन के बारे में क्यों बताया जाए ताकि आप इन सभी विकल्पों के बारे में जान सकें।

सेलुलर या मोबाइल प्रौद्योगिकी कनेक्शन क्या है?

सेलुलर प्रौद्योगिकी प्रदान करता है वायरलेस इंटरनेट का उपयोग सेल फोन के माध्यम से है। सेवा प्रदाता के हिसाब से गति भिन्न हो सकती है, लेकिन सबसे सामान्य 3G और 4G गति ही होती है।
यहाँ 3G वर्णन करता है एक 3 पीढ़ी सेलुलर नेटवर्क को जिसके मोबाइल की गति लगभग 2.0 mbps के आसपास होती है।

सेल्युलर वायरलेस मानकों की समान 4G का मतलब चौथी पीढ़ी है। वैसे तो 4G का लक्ष्य होता है कि एक शिखर मोबाइल की गति लगभग 100 mbps को प्राप्त करना लेकिन वास्तविकता में यह केवल 21 mbps तक ही वर्तमान में उपलब्ध है।

वहीँ 5G अभी तक केवल कुछ ही स्थानों में उपलब्ध हो पाया है और ज्यादातर परीक्षण चरण में ही है।

मोबाइल में इन्टरनेट कैसे चलायें?

स्मार्टफ़ोन जैसे की आईफ़ोन और एंड्रॉइड फोन, बहुत ही छोटे हैंडहेल्ड कंप्यूटर होते हैं, जिसमें निर्मित जीपीएस और कैमरा की सुविधा रहती है। वहीँ बहुत से लोगों के लिए उनका स्मार्टफ़ोन ही टूल होता है जिसमें इंटरनेट एक्सेस करने के लिए है।

ज्यादातर स्मार्टफोन दो अलग-अलग प्रौद्योगिकियों का इस्तमाल करते हैं इंटरनेट को एक्सेस करने के लिए – पहला है सेलुलर नेटवर्क जिसे उपयोगकर्ता को सदस्यता करना होता है, जैसे की एयरटेल, Jio, Idea इत्यादि। वहीँ दूसरा है वायरलेस कनेक्शन।

इसमें सेल नेटवर्क में सबसे बड़ा लाभ ये हैं कि इससे आप कहीं पर भी हैं और कभी-कभी इंटरनेट एक्सेस प्राप्त हो सकता है। वहीँ वायरलेस नेटवर्क में आपको मॉडेम के करीब होना आवश्यक होता है बेहतर गति प्राप्त के लिए क्यूंकि इसका एक कवरेज क्षेत्र होता है।

कंप्यूटर या पीसी इन्टरनेट कैसे चलायें?

यदि आप अपने कंप्यूटर या पीसी में इंटरनेट चलाना चाहते हैं तो आपको इसके लिए या तो ब्रॉडबैंड कनेक्शन लेना होगा किसी को ISP से या उनका कोई वायरलेस कनेक्शन भी ले सकते हैं। इसका इस्तमाल कर आप अपने कंप्यूटर में इंटरनेट एक्सेस कर सकते हैं।

वहीँ अगर आपके पास अगर इतना पैसा नहीं है तो तब भी आप इंटरनेट एक्सेस चाहते हैं तो तब आप अपने स्मार्टफोन को एक हॉटस्पॉट के तोर पर इस्तमाल कर भी इंटरनेट एक्सेस प्राप्त कर सकते हैं।

इंटरनेट के लाभ

1. इसको ज्यादा तोर पर सामाजिक नेटवर्किंग, शिक्षा, मनोवैज्ञानिक, ऑनलाइन जानकारी देने में जयादा मददगार होता है।

2. अपने समय की बचत तो आप करेंगे और आप चाहते हैं तो बोहत कुछ सिखा सकते हैं।

3.इसके उपयोग से हम कोई भी सूचना को बड़ी आसानी से ढूंड कर सकते हैं। जैसे हम Google में करते हैं।
किसीको भी बड़ी आसानी से संदेश, ऑडियो, वीडियो, दस्तावेज़ इंटरनेट में हम भेज सकते हैं जैसे की व्हाट्सएप, फेसबुक, ट्विटर में हर कोई करता है।

4. अगर पढाई की बात की जाए आजकल हर कोई ऑनलाइन पढाई कर सकता है और शोध कर सकता है।

5. और सबसे अच्छा फायदा- ऑनलाइन सेवाओं जैसे ऑनलाइन शॉपिंग, ऑनलाइन रिचार्ज, मूवी टिकट बुकिंग, इंटरनेट बैंकिंग, ऑनलाइन लेनदेन ये सब इंटरनेट की वजह से ही हो पाया है।

6. इसके साथ अगर हो आप किसी के साथ आमने सामने मतलब वीडियो कालिंग कर सकते है।

7. इसकी वजह से ही आजकल ई-कॉमर्स साइट बोहत ही तेजी से आगे बढ़ रही हैं।

8. इसमें आप सूचना साझा कर सकते हैं, ई-मेल जैसी सुविधा आपको इंटरनेट की वजह से मिल सकती है।

9. मनोरंजन के लिए भी आपको इसकी की सक्त आवश्यकता है। हालांकि आप गाने डाउनलोड कर सकते हैं, वीडियो देख सकते हैं, दु:खी को दूर करने के लिए ऑनलाइन गेम खेल सकते हैं।

10. सबसे बड़ा फायदा यह है कि आप के सभी सवालों के जवाब मिल जायेंगे जैसे अभी आपको ये भी मिल जाएगा इंटरनेट क्या है।

11. आपको हर पल की खबर आपको मिलती है, जब चाहो तब, इसके साथ विज्ञान, टेक्नोलजी, की भी जानकारी मिलती है इंटरनेट में।

इंटरनेट की हानि

1.इसका का नुकसान इसकी लत है, अगर आपको लत लग गई तो अप इसके पीछे लगे रहें गे और क्या होगा इससे आपका वक्त बर्बाद होगा।

2. वहाँ भी कुछ भी लिख के शेयर कर देता है कि क्या वह सही हो या गलत, इससे गलत जानकारी लोगों को प्रभावित करने के लिए है

3. इसके जरिये अगर आपका सारा डाटा आपके कंप्यूटर से कोई भी चुरा सकता है तो हैकर्स के जरिये।

4. कभी कभी कोई भी गलत वीडियो (mms) बड़ी तेजी से नेट में फ़ैल जाता है यह भी एक नुकसान है।

5. कंप्यूटर वायरस इंटरनेट से ही आपके कंप्यूटर तक पोहंच हो सकता है जिससे आपके पूरे डेटा गायब हो सकते हैं और आपका कंप्यूटर को भी धीमा कर देता है।

6. बोहत सभी प्रोनोग्र्फी साइट नेट में होते हैं जिसमें अश्लील तस्वीर और वीडियो रहता है और इनसे बचों के दिमाग पर बोहत ही बुरा असर पड़ता है।

7. इसमें सोशल साइट जैसे फेसबुक, इंस्टाग्राम रहता है उनमे कुछ लोग किसी की भी तस्वीर छोड़ देते हैं ये भी इंटरनेट का नुकसान हैं।

8. इंटरनेट पे कुछ ऐसी वेबसाइट होती हैं, जिनमे लोग आप से कुछ सवाल पूछते हुए सारी जानकारी ले लेते हैं और उसका वो गलत फ़ायदा उठाते हैं।

9. इंटरनेट के इस्तेमाल से जैसे आपका वक्त बढ़ता है वैसा ही आपका वक्त भी बर्बाद करता है।

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