बीमा क्या है। और बीमा के प्रकार कितने हैं?

insurance kiy hai or kitne type ke hote hai in hindi

बीमा भविष्य में किसी नुकसान की आशंका से निपटने का प्रभावी हथियार है। हमें नहीं पता कि कल क्या होगा, इसलिए हम बीमा पॉलिसी के जरिये भविष्य में संभावित नुकसान की भरपाई की कोशिश करते हैं। इंश्योरेंस का मतलब जोखिम से सुरक्षा है। अगर कोई बीमा कंपनी किसी व्यक्ति का बीमा करती है तो उस व्यक्ति को होने वाले आर्थिक नुकसान की भरपाई बीमा कंपनी करेगी। इसी तरह अगर बीमा कंपनी ने किसी कार, घर या स्मार्टफोन का बीमा किया है तो उस चीज के टूटने, फूटने, खोने या क्षतिग्रस्त होने की स्थिति में बीमा कंपनी उसके मालिक को पहले से तय शर्त के हिसाब से मुआवजा देती है। बीमा वास्तव में बीमा कंपनी और बीमित व्यक्ति के बीच एक अनुबंध है. इस कॉन्ट्रेक्ट के तहत बीमा कंपनी बीमित व्यक्ति से एक निश्चित धनराशि (प्रीमियम) लेती है और बीमित व्यक्ति या कंपनी को पॉलिसी की शर्त के हिसाब से किसी नुकसान की स्थिति में हर्जाना देती है।

बिमा क्या है? – What Is Insurance

Insurance को हिंदी में बिमा कहते है। बिमा यह शब्द फारसी से आया है इसका अर्थ है ‘ज़िम्मेदारी लेना’। इसका अनुवाद डॉ. रघुवीर ने ‘आगोप’ ऐसा किया है। इसका अंग्रेजी पर्याय “इंश्योरेंस” (Insurance) है।

बिमा या इंश्योरेंस ये भविष्य के लिए एक ऐसी व्यवस्था है की, जिसमे कोई भी बिमा कंपनी आपको किसी भी प्रकार का नुकसान होने का, बीमारी का, दुर्घटना या मृत्यु के बाद मुआवजा देने की गारंटी देती है।

आज के इस भीड़ भाड़ वाले जीवन में किसे कब क्या होगा यह कोई नही जानता, ऐसे में आप अपने मूल्यवान चीजों का अभी सही तरीके से इंश्योरेंस करेंगे तो आपके लिए वो एक बैकअप के जैसे काम करेंगा और मुसीबत आने पर इंश्योरेंस आपके बहुत काम आयेगा।

वैसे बाजार में ऐसी बहुत सी इंश्योरेंस कंपनियां है, जो इंश्युरंस बेचती है और उन सब के इंश्योरेंस plan की एक अलग ख़ासियत होती है लेकिन आपको सोच समझकर नीति लेनी चाहिए जब आपके ज़रूरतों के मुताबिक़ आपको वो सही लगे और बाद में आपको कीसी प्रकार की परेशानी ना हो। जैसे car, home, health, life आमतौर पर इन मूल्यवान चीजों का इंश्योरेंस कराया जाता है।

इंश्योरेंस एक Safe और Secure तरीका है, जो आपके आर्थिक स्थिति में आपके परिवार और आप पर निर्भर व्यक्ति को मजबूत बना सकता हैं, ताकि भविष्‍य में आपकी मृत्‍यु हो जाती है या किसी अन्य घटनाओं से आपका कोई नुकसान भी हो जाता है, तो उस वक्त आपको या आपके परिवार को पैसों से सम्‍बन्धित किसी भी प्रकार की समस्‍या का सामना नहीं करना पड़ता, इंश्योरेंस नीतियों से आपकी समस्या दूर हो जाती है इसलिए इंश्योरेंस होना आज बहुत ही जरूरी हुआ है।

बिमा के प्रकार – Types of Insurance

इंश्योरेंस या बिमा अलग अलग प्रकार के होते है  जैसे  जीवन बिमा, घर का बिमा, स्वास्थ्य बिमा, दुर्घटना बीमा, वाहन बिमा, यात्रा बिमा, फसल किसान बीमा योजना और मोबाइल बिमा

जीवन बिमा – Life Insurance

जीवन बिमा, बीमा कंपनी और बिमा लेने वाले व्यक्ति के बिच किया जानेवाला जीवन बिमा एक प्रकार का समझौता होता है, जिसमे इश्युरंस कंपनी यह गारंटी देती है की भविष्य में पॉलिसी धारक की मृत्‍यु हो जाती है, तो उसके परिवार में से नामांकित को बीमा कंपनी द्वारा नियम व शर्तें के अनुसार एक निश्चित राशि का भुगतान किया जाएगा ताकि उन्हें कोई आर्थिक संकट ना आये, लेकिन ये राशि उतनी ही दी जाती जितने उस व्‍यक्तिने बीमा करवाया था।

यह जीवन बिमा इस बात पर निर्भर करता है की उस व्यक्ति की मृत्यु कब हुई, कैसे और किस वजह से हुई। किसी के जीवन का कोई भरोसा नहीं होता इसलिए लोग खासकर अपने परिवारों के लिए ही जीवन बीमा योजना छोड़ जाते है। ज्यादातर लोग जीवन बीमा योजना इस बिमा को अपनाते है ताकि उनके जाने के बाद उनके परिवार के लोगो को पैसों की कुछ मदद हो जाये।

जीवन बीमा के प्रकार – Types of Life Insurance

अगर कोई परिवार का एकमात्र कमाने वाला शख्स है तो उसके जाने के बाद जीवन बीमा (Life Insurance) उस पर निर्भर लोगों को कुछ हद तक वित्तीय तौर पर राहत देता है। लेकिन यह केवल एक तरह का नहीं होता है। कुछ पॉलिसी कवर के साथ-साथ सेविंग्स व निवेश के जरिए रिटर्न पाने का भी विकल्प देती हैं। यानी यह बीमा कराने वाले के खुद के भी काम आता है। भारत में 8 तरह की लाइफ इंश्योरेंस पॉलिसी उपलब्ध हैं। बीमा कराने वाला अपनी जरूरत के मुताबिक अपने लिए पॉलिसी का चुनाव कर सकता है।

1. टर्म इंश्योरेंस प्लान

यह प्लान एक निश्चित समय के लिए खरीदा जा सकता है, जैसे 10, 20 या 30 साल. इस प्लान में चुने गए एक टेनर यानी अवधि के लिए कवरेज मिलता है। ऐसी लाइफ इंश्योरेंस पॉलिसी में मैच्योरिटी बेनिफिट नहीं होता ये सेविंग्स/प्रॉफिट कंपोनेंट के बिना लाइफ कवर उपलब्ध कराती हैं। लिहाजा ये अन्य पॉलिसी की तुलना में सस्ती होती हैं। टर्म इंश्योरेंस में पॉलिसी टर्म के दौरान पॉलिसी धारक की मृत्यु होने पर पॉलिसी के तहत एश्योर्ड सम यानी एक तय रकम बेनि​फीशियरी को दी जाती है।

2. मनीबैक इंश्योरेंस पॉलिसी

ये पॉलिसी एक तरह की एंडोमेंट पॉलिसी ही है। इस पॉलिसी में भी निवेश और बीमा का मेल है। अंतर इतना है कि इस लाइफ इंश्योरेंस पॉलिसी में बोनस के साथ एश्योर्ड सम पॉलिसी टर्म के दौरान ही किस्तों में वापस किया जाता है। आखिरी किस्त पॉलिसी खत्म होने पर मिलती है। अगर पॉलिसी टर्म के दौरान पॉलिसीधारक की मृत्यु हो जाती है तो पूरा एश्योर्ड सम बेनिफीशियरी को मिलता है। हालांकि इस पॉलिसी का प्रीमियम सबसे ज्यादा होता है।

3. एंडोमेंट पॉलिसी

इस तरह की लाइफ इंश्योरेंस पॉलिसी में बीमा और निवेश दोनों होते हैं। इस पॉलिसी में एक निश्चित अवधि के लिए रिस्क कवर होता है। और उस अवधि के खत्म होने बोनस के साथ एश्योर्ड सम पॉलिसीधारक को वापस किया जाता है।पॉलिसीधारक की मौत होने या निर्धारित सालों के बाद एंडोमेंट पॉलिसी के तहत पॉलिसी अमाउंट की फेस वैल्यू का भुगतान किया जाता है। कुछ पॅलिसी गंभीर बीमारी के मामले में भी भुगतान करती हैं।

4. सेविंग्स एंड इन्वेस्टमेंट प्लान्स

इस तरह का लाइफ इंश्योरेंस प्लान बीमा लेने वाले और उसके परिवार को भविष्य के खर्चों के लिए एकमुश्त फंड का भरोसा दिलाता है। ऐसे प्लान शॉर्ट टर्म और लॉन्ग टर्म वित्तीय लक्ष्यों के लिए बेहतरीन सेविंग्स टूल तो उपलब्ध कराते ही हैं, साथ ही इंश्योरेंस कवर के रूप में आपके परिवार को एक निश्चित धनराशि का आश्वासन भी देते हैं। इस प्रकार की लाइफ इंश्योरेंस कैटेगरी में ट्रेडि​शनल और यूनिल लिंक्ड दोनों तरह के प्लान्स कवर होते है।

5. यूलिप

इस प्लान में भी प्रोटेक्शन और निवेश दोनों रहते हैं। ट्रेडिशनल यानी एंडोमेंट इंश्योरेंस पॉलिसी और मनीबैक पॉलिसी में मिलने वाला रिटर्न एक हद तक पक्का होता है, वहीं यूलिप में रिटर्न की कोई गारंटी नहीं होती है। इसकी वजह है कि यूलिप में निवेश वाले हिस्से को बॉन्ड और शेयर में लगाया जाता है और म्यूचुअल फंड की तरह आपको यूनिट मिल जाती है। ऐसे में रिटर्न मार्केट के उतार-चढ़ाव पर बेस्ड होता है. हालांकि आप तय कर सकते हैं कि आपका कितना पैसा शेयर में लगे और कितना पैसा बॉन्ड में लगे।

6. आजीवन लाइफ इंश्योरेंस

आजीवन लाइफ इंश्योरेंस यानी (Whole Life Insurance Plan) में आपको जीवनभर प्रोटेक्शन मिलता है। यानी पॉलिसी का कोई टर्म नहीं होता पॉलिसीधारक की मृत्यु होने पर, नॉमिनी को बीमा का क्लेम मिलता है। अन्य लाइफ इंश्योरेंस पॉलिसी में उम्र की एक मैक्सिमम लिमिट होती है, जो आमतौर पर 65-70 साल होती है। उसके बाद मौत होने पर नॉमिनी डेथ क्लेम नहीं ले सकता। लेकिन आजीवन लाइफ इंश्योरेंस के तहत पॉलिसीधारक की मौत 95 साल की उम्र में ही क्यों न हुई हो, नॉमिनी क्लेम कर सकता है। इस पॉलिसी का प्रीमियम काफी ज्यादा रहता है। इस पॉलिसी के तहत पॉलिसीधारक के पास इंश्योर्ड सम को आंशिक रूप से विदड्रॉ करने का विकल्प रहता है। इसके अलावा वह पॉलिसी के एवज में पैसा लोन के तौर पर भी ले सकता है।

7. चाइल्ड इंश्योरेंस पॉलिसी

ये प्लान बच्चों की शिक्षा के खर्च और अन्य जरूरतों को देखते हुए डिजाइन किए गए हैं। चाइल्ड प्लान में पॉलिसीधारक की मृत्यु के बाद एकमुश्त रकम का भुगतान किया जाता है। लेकिन पॉलिसी खत्म नहीं होती है। भविष्य के सारे प्रीमियम माफ कर दिए जाते हैं और इंश्योरेंस कंपनी पॉलिसीधारक की ओर से निवेश जारी रखती है। बच्चे को एक निश्चित अवधि तक पैसा मिलता है।

8. रिटायरमेंट प्लान

इस प्लान में लाइफ इंश्योरेंस कवर नहीं मिलता है। यह एक रिटायरमेंट सॉल्यूशन प्लान है इसके तहत आप ​अपने रिस्क का आकलन कर एक रिटायरमेंट फंड बना सकते हैं। तय की गई एक अवधि के बाद आपको या आपके बाद बेनि​फीशियरी को पेंशन के तौर पर एक निश्चित रकम का भुगतान किया जाएगा। यह भुगतान मासिक, छमाही या सालाना आधार पर हो सकता है।

घर का बिमा – Home Insurance

आप अपनी मेहनत की कमाई से घर बनवाते है तो आपको घर का बिमा (home Insurance) भी कर लेना चाहिए। घर का बिमा में घर का Structure, घर का सामान इन सब के अनुसार एक नीति बनवायी जाती है, अगर अचानक से कोई दुर्घटना हो जाने पर जैसे भूकंप, बाढ, या घर के सामान खराब हो जाने पर इसकी सारी भरपाई बिमा कंपनी से कर दी जाती है।

आज बहुत से लोग अपने घर का बिमा निकालते है जिसके जरिये वो अपने घर को सुरक्षित रख सकते है इसलिए घर का बिमा करना बहुत जरूरी और आवश्यक हुआ है।

वाहन बिमा – Vehicle Insurance

यदि आपके पास car, bike, motor, auto या कोई भी गाड़ी है, तो उसका बिमा करवाना बहुत जरूरी है क्योंकि किसी भी प्रकार की दुर्घटना होने पर हमे आर्थिक नुकसान से बचाता है, इसलिए वाहन बिमा करवाना बहुत आवश्यक है।

भारत में दो प्रकार के वाहन बिमा होते है: 1) Third party insurance 2) Full party insurance

1. Third party insurance: इस प्रकार के इन्शुरन्स में यदि आपके पास जो भी वाहन है उस वाहन से दुर्घटना हो जाती है और उसी समय दूसरे गाड़ी के ड्राइवर या गाड़ी का नुकसान हो जाता है तो उन्हें बीमा कंपनी भरपाई करके देती है। लेकिन आपको या फिर आपकी गाड़ी का नुकसान होने पर इन्शुरन्स कंपनी किसी तरह का क्लेम नही देती, इसलिए इसे थर्ड पार्टी इन्शुरन्स भी कहते है। मोटर अधिनियम के अनुसार यह बिमा अनिवार्य है।

2. Full party insurance: इस प्रकार के इन्शुरन्स में एक्सीडेंट होने पर सभी का नुकसान जैसे गाड़ी, ड्राइवर, और गाड़ी में बैठे वाले लोग और दूसरे गाड़ी का नुकसान जैसे छोटी-बड़ी टूट फुट के लिए और बाकी नुकसान की भरपाई इन्शुरन्स कंपनी देती है।

फसल किसान बीमा योजना – Crop & Farmer insurance

दोस्तों मौसम का कुछ भरोसा नही किया जाता कभी बारिश आती है तो कभी नही भी आती इसकी वजह से आपकी खेती का बहुत नुकसान भी हो जाता है तो ऐसे में आपको हर साल अपने फसल का बिमा कर लेना चाहिये।

इस बिमा में आपकी फसल को एक प्रकार की सुरक्षा मिल जाती है, अगर आपके फसल का कुछ नुकसान होता है, तो ऐसे में बीमा कंपनी आपके सारे नुकसान की भरपाई करती है, इसलिए आप अगर किसान हो तो आपको फसल बीमा और किसान बीमा जरुर करना चाहिए।

यात्रा बिमा – Travel Insurance

कभी आप अकेले या अपने परिवार के साथ यात्रा कर रहे हो, तो ऐसे में आपका यात्रा बिमा करना बहुत ही आवश्यक है।

अगर आपको कभी ट्रेवल करना है, तो घर से निकलने से पहले ही सबकुछ प्लान करके निकलना चाहिए, ताकि यात्रा के दौरान आने वाले परेशानियों से आपको ना गुजरना हो। अगर आप अकेले से कुछ मैनेज नहीं हो पाता, तो ऐसे वक्त में आप यात्रा बिमा को अपना सकते हो।

और एक बात यह है की, यात्रा के दौरान कोई दुर्घटना हो जाने पर, या फिर यात्रा में देरी होना जैसे की फ्लाईट डिले होना, फ्लाईट कैंसल होना ऐसे में यात्रा बिमा आपके हुए नुकसान का पूरा खर्चा उठाती है, इसलिए यात्रा बिमा होना बहुत ही जरूरी है।

मोबाइल बिमा – Mobile Insurance 

आज सब के पास मोबाइल फोन है, तो आपने यह भी सुना होगा की Mobile का भी Insurance करना जरूरी होता है। आज हर किसी के पास एक से बढ़कर एक मेहेंगे मेहेंगे मोबाइल है और यदि आपके मोबाइल फोन का कभी कुछ छोटा बड़ा नुकसान हो जाता है, तो ऐसे में बीमा कंपनी आपको उसकी सारी भरपाई करके देती है, इसलिए मोबाइल बीमा करना भी बहुत आवश्यक हुआ है।

बीमा क्या है? और बीमा कैसे ले।