डिजिटल इंडिया क्या है और इसकी शुरुआत कब हुई थी?

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डिजिटल इंडिया की शुरुआत कब हुई थी

बहुत लोग ये जानना चाहते हैं के डिजिटल इंडिया कब से शुरू हुआ है? इसकी शुरुवात 1 जुलाई 2015 को हमारे प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी के द्वारा की गयी थी। इसका मुख्य उद्देश्य है- ऐसे ग्रामीण क्षेत्रों को उच्च गति वाले इंटरनेट नेटवर्क से कनेक्ट किया जाना और डिजिटल साक्षरता में सुधार किया जाना है।

डिजिटल इंडिया कार्यक्रम एक प्रमुख कार्यक्रम है भारत सरकार का जिसकी एक मात्र दृष्टि यह है कि कैसे पुरे भारतवर्ष को एक डिजिटल रूप से सशक्त समाज और ज्ञान अर्थव्यवस्था को संशोधित किया जाना चाहिए। इसी तरह की प्रौद्योगिकी संचालित कार्यक्रम भारत में नए नहीं हैं क्यूंकि ई-गवर्नेंस पहल भारत में 1990 में बड़ा रूप लिया गया और इसे बहुत से क्षेत्रों में इस्तमाल में लाया गया जिसमें कुछ प्रमुख परियोजनाएं भी शामिल थीं जैसे की रेलवे कम्प्यूटरीकरण, भूमि रिकॉर्ड कंप्यूटरीकरण इत्यादि। इनका मुख्य फोकस सूचना प्रणाली का विकास कैसे सुचारू रूप से किया गया था। बाद में कई राज्यों ने अपने ही व्यक्तिगत ई-गवर्नेंस प्रोजेक्ट शुरू किए जोए के नागरिकों को इलेक्ट्रॉनिक सेवाएं प्रदान करते हैं।

भले ही ये ई-गवर्नेंस प्रोजेक्ट्स ज्यादा नागरिक-केंद्रित थे, लेकिन इनकी सीमित विशेषताओं के होने से इनका ज्यादा प्रभाव नहीं हुआ। इन परियोजनाओं को अलग-थलग और कम इंटरैक्टिव सिस्टम होने के कारण वह इसके भीतर स्तिथ अंतराल को उजागर कर देती हैं इसलिए इनका सफल गोद लेने का तरीका नहीं मिला है। जिस कारन में यह स्पष्ट रूप से दिखाई देता है, उसकी एक और बहुत व्यापक योजना और कार्यान्वयन की आवश्यकता है, जिसके लिए बुनियादी ढांचे की आवश्यकता है, अंतर-समस्या वाले मुद्दों को संबोधित करने के लिए। ऐसी करने से एक और बहुत बेहतर और जुड़ी सरकार बनाने की आवश्यकता हैं।

ऐसे में इस समस्या को ठीक करने के लिए एक सहभागी, पारदर्शी और उत्तरदायी सरकार बनाई गई, जिसे हमारे प्रधान मंत्री नरेंद्र मोदी ने 1 जुलाई 2015 को दिल्ली के इंदिरा गांधी इंडोर स्टेडियम से शुरू किया और इसका नाम ‘डिजिटल इंडिया’ रखा गया। । इसलिए बिना देरी किए चलिए शुरू करते हैं और डिजिटल इंडिया प्रोजेक्ट के विषय में जानते हैं।

डिजिटल इंडिया क्या है?

भारत को एक डिजिटल रूप से सशक्त समाज और एक जानकार अर्थव्यवस्था को संशोधित किया जाना चाहिए। इसके उद्देश्यों को पूर्ण करने के लिए, इस कार्यक्रम में एक ऐसा पारिस्थितिकी तंत्र स्थापित किया गया है जो की बहुत सारे मंत्रालयों और सरकारी विभागों के मिलने से बना हुआ है।

इसकी पहल समन्वित हुई हैं, इलेक्ट्रॉनिक्स और सूचना प्रौद्योगिकी विभाग (डीईआईटीवाई) के द्वारा। नागरिकों को सार्वजनिक सेवाओं तक पहुँचाना सूचना प्रौद्योगिकी के इस्तमाल से एक बहुत ही महत्वपूर्ण उद्देश्य है डिजिटल इंडिया कार्यक्रम का जिससे नागरिकों को प्रौद्योगिकी सक्षम करने में सक्षम हो सके। इस डिजिटल इंडिया कार्यक्रम को हमारे प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी ने 1 जुलाई 2015 को शुरू किया।

यदि सच में इस डिजिटल इंडिया पहल को लागू करना है तो इस पहल के लिए कुछ प्रारंभिक उपाय करने होंगे। जैसे की पर्याप्त भौतिक बुनियादी ढांचे का निर्माण करना होगा, महत्वपूर्ण शासन सेवाओं के लोगों तक ई-मोड के माध्यम से पहुँचाना होगा और साथ में लोगों के बिच डिजिटल साक्षरता की जागरूकता बढ़नी होगी, मतलब की लोगों को प्रौद्योगिकी से रूबरू कराना होगा जिससे वह आसानी से डिजिटल हो सके प्रौद्योगिकी को संभाल कर सकता है।

1. डिजिटल इन्फ्रास्ट्रक्चर का होना: इसके लिए हाई-स्पीड इंटरनेट सुविधा, मोबाइल फोन और बैंक अकाउंट, कॉमन सर्विस सेंटर की पहुंच होनी चाहिए। Ra ही इंटरनेट पहचान, साझा निजी स्थान एक सार्वजनिक बादल में और सुरक्षित, सुरक्षित साइबरस्पेस की आवश्यकता होती है।

2. उपलब्ध माँग पर शासन और सेवाएं: वास्तविक समय में ऑनलाइन और मोबाइल प्लेटफ़ॉर्म के लिए होनी चाहिए। होनी इन समेकित रूप से विभागों और क्षेत्रों के बीच एकीकृत होना चाहिए। सभी नागरिक दस्तावेजों को उपलब्ध क्लाउड प्लेटफॉर्म में भौतिक दस्तावेजों की आवश्यकता को कम से कम किया जाना चाहिए। कैशलेस इलेक्ट्रॉनिक लेनदेन और भौगोलिक सूचना प्रणाली (जीआईएस) को एकीकृत करना इस योजना के लिए होगा।

3. सभी नागरिकों को, मुख्य रूप से ग्रामीण नागरिकों को डिजिटल साक्षरता से रूबरू करना होगा, जिससे वह सरकार के सभी कार्यक्रमों का इस्तमाल कर सकें।

भारत डिजिटल इंडिया कैसे बनेगा?

डिजिटल प्रौद्योगिकियों हमारे समाज के लगभग सभी पहलुओं पर असर डालती है। इसलिए यह डिजिटल इंडिया का कार्यक्रम ज्यादा क्षेत्र को कवर करता है भारत को एक डिजिटल रूप से सशक्त देश बनाने में।
सरकार ने ऐसे नौ स्तंभों की पहचान की है जो डिजिटल इंडिया के जो की बहुत ही जरुरी हैं।

1. ब्रॉडबैंड हाईवे: सरकार ने पुरे 2.5 लाख ग्राम पंचायत में राष्ट्रीय ऑप्टिकल फाइबर नेटवर्क बिछाने का सोचा हुआ है। इस परियोजना के लिए दूरसंचार विभाग (DoT) केवल नोडल विभाग है। 2020 तक सभी पंचायत में ये ब्रॉडबैंड की सुविधा देने की समय सीमा प्रदान की गई है।

राष्ट्रीय सूचना अवसंरचना (NII) का इस्तमाल कर नेटवर्क और क्लाउड इन्फ्रास्ट्रक्चर को एकीकृत किया जा सकता है, जिससे की पुरे देश में उच्च गति कनेक्टिविटी और क्लाउड प्लेटफॉर्म की सुविधा प्रदान की जा सकती है। ये सुविधा सरकारी विभागों से पंचायत स्तर तक हर जगह में बदल सकती है। ब्रॉडबैंड नेटवर्क में जो बुनियादी ढांचे के घटक का इस्तमाल किया जाता है, वे हैं: स्टेट वाइड एरिया नेटवर्क (स्वान), नेशनल नॉलेज नेटवर्क (एनकेएन), नेशनल ऑप्टिकल फाइबर नेटवर्क (एनओएफएन), गवर्नमेंट यूजर नेटवर्क (जीयूएन) और मेघराज बादल। DeitY इस परियोजना में इसका नोडल विभाग होता है।

2. फोन को यूनिवर्सल एक्सेस प्रदान करना: मोबाइल फोन कवरेज को देश में बाकि बचे 55,619 गांवों को प्रदान करना है। इसमें दूरसंचार विभाग एक नोडल विभाग बन सकता है और इस परियोजना की लागत लगभग 16,000 करोड़ रुपये है, जो वर्ष 2014-18 के बीच है।

3. सार्वजनिक इंटरनेट पहुंच कार्यक्रम की शुरुआत: सामान्य सेवा केंद्र (सीएससी) को मजबूत किया जा सकता है और उनकी संख्या को भी बढाया जा सकता है जिससे प्रत्येक पंचायत को एक सीएससी (कुल 250000 सीएससी) मिल सके। CSCs को कुछ इस प्रकार से बनाना है जिससे उसमें बहुत बेहतर रूप से बहुआयामी अंत-बिंदु संभव हो जाते हैं सरकार और व्यावसायिक सेवाएं प्रदान करने के लिए। डीआईटीवाई में भी नोडल विभाग होता है इस योजना को लागू करने के लिए।

4. ई-गवर्नेंस – प्रौद्योगिकी के मदद से सरकार को सुधार करना: डिजिटल प्रौद्योगिकी का इस्तमाल सरकारी सेवाओं की बेहतर डिलीवरी के लिए किया गया है। सरकार का लक्ष्य होता है कि वह कैसे अपनी प्रक्रियाओं और सेवाओं की डिलीवरी में सुधार करे। उदाहरण के लिए ई-गवर्नेंस UIDAI के इस्तमाल से, भुगतान गेटवे, EDI और मोबाइल प्लेटफ़ॉर्म। अब तो स्कूल प्रमाण पत्र, मतदाता पहचान पत्र को ऑनलाइन ही प्रदान किया जाता है। (पूर्व डिग्गी-लॉकर)। यहाँ पर डेटाबेस और सूचना को इलेक्ट्रॉनिक रूप में रखा जाता है न की मैनुअल रूप में।

5. e-Kranti -Electronic Delivery की सेवाएं: e-Kranti एक उन्नत ई-गवर्नेंस प्रोग्राम जो की शासन सेवाएं प्रदान करता है, इलेक्ट्रॉनिक मोड के माध्यम से है। इसमें लगभग 44 मिशन परियोजनाएं शामिल हैं। यह कार्यक्रम एकीकृत करता है पिछले राष्ट्रीय ई-शासन योजना को। वहीँ सार्वजनिक सेवाओं जो की संबंधितित होते हैं वे हैं स्वास्थ्य, शिक्षा, किसान, न्याय, सुरक्षा और वित्तीय समावेशन इत्यादि से उन सभी को इलेक्ट्रॉनिक रूप से प्रशासित किया जाता है ई-क्रांति के तहत।

6. सभी को जानकारी: सभी जानकारी जो की संबंधित होती हैं शासन और सार्वजनिक सेवाओं से नागरिकों के लिए, उन्हें बड़ी ही आसानी से डिजिटल प्लेटफार्मों के मदद से सभी तक कामया जाता है।

7. इलेक्ट्रॉनिक्स, विनिर्माण जिसमें लक्ष्य नेट शून्य आयात हो: डिजिटल इंडिया के इस स्तंभ का उद्देश्य होता है डिजिटल प्रौद्योगिकी उपकरणों के विनिर्माण को बढ़ावा देना, जो की ख़ास तोर से इलेक्ट्रॉनिक्स होता है हमारे देश में। भारत में इलेक्ट्रॉनिक्स की मैन्युफैक्चरिंग को इतना बढ़ावा देना चाहिए जिससे एक लक्ष्य शून्य शुद्ध आयात का वर्ष 2020 तक हो जाएगा। इसके तहत कई कदम उठाए जा रहे हैं राष्ट्रीय इलेक्ट्रॉनिक नीति के तहत। जिसमें कराधान प्रोत्साहन, लागत में कमी, इनक्यूबेटरों को बढ़ावा देना, क्लस्टर, कौशल विकास इत्यादि शामिल हैं।

8. आईटी का इस्तमाल जॉब्स के लिए: यह स्तंभ ध्यान केंद्रित करता है, कौशल और प्रशिक्षण प्रदान करने के लिए युवाओं को जिससे वह आईटी / आईटीईएस क्षेत्र में रोजगार के अवसरों को प्राप्त कर सकें। इसके तहत आठ घटकों को शामिल किया गया है, जिनकी गतिविधियों के कुछ विशिष्ट दायरे हैं: जैस वन आई फोकसिंग वंचित क्षेत्रों में – ग्रामीण क्षेत्रों और उत्तर पूर्व में, 1 करोड़ छात्रों को आईटी / आईटीईएस सेक्टर में प्रशिक्षण प्रदान करना, इसके अलावा तीन लाख सेवा वितरण एजेंट को। प्रशिक्षण प्रदान करना शामिल हैं।

9. अर्ली हार्वेस्ट प्रोग्राम्स: इस पिलर के अंतर्गत, सरकार वाई-फाई सुविधाएं स्थापित करती हैं। ईजी सभी विश्वविद्यालयों और सार्वजनिक स्थानों में सुरे देशभर में, ई-बुक्स की सुविधा स्कूलों में प्रदान की जाएगी, ईमेल को प्राथमिक संचार माध्यम बनाया जाएगा, आधार एनोमेट्रिक उपस्थिति प्रणाली को सभी केंद्र सरकार के कार्यालयों में तैनात किया जाएगा इत्यादि।

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