दीपावली क्या है? और यह क्यो मनाई जाती है।

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दीपावली भारत में मनाया जाने वाला सबसे बड़ा हिंदू त्यौहार है। दीपावली, दीवाली या दीवाली संस्कृत भाषा का शब्द है जिसका अर्थ “रोशनी की पंक्ति या रोशनी की श्रृंखला” है। दीपावली शब्द संस्कृत के शब्द दीप (दीपक, प्रकाश, लालटेन, मोमबत्ती) और आवली (“रोशनी की पंक्ति” या “रोशनी की श्रृंखला”) से लिया गया है, जो संयुग्मित होकर दीप+आवली = दीपावली (“रोशनी की पंक्ति” या “रोशनी की श्रृंखला”) शब्द बना। इस दौरान भगवान श्री गणेश और मां लक्ष्मी की पूजा की जाती है।

दीपावली का त्योहार कार्तिक मास की अमावस्या को मनाया जाता है जो ग्रेगोरियन कैलेंडर (Gregorian calendar) (ग्रेगोरी कालदर्शक) के अनुसार अक्टूबर या नवंबर महीने में पड़ता है। दीपावली भारत के सबसे बड़े और सर्वाधिक लोकप्रिय त्योहारों में से एक है। दीपावली दीपों का त्योहार है, आध्यात्मिक रूप से यह अन्धकार पर प्रकाश की विजय को दर्शाता है।

दीपावली रोशनी का त्योहार है, पूरे भारत मे इसे बडे धूम-धाम से मनाया जाता है। दीयो की जगमगाहट के बीच हर कोई ईश्वर से सुख-समृद्धि की प्रार्थना करता है। पटाखो की आवाज़, मोमबत्ती का प्रकाश, यह सब दीपावली की शान है। भारत के लोगो के लिए दीवाली के दिन से ही नया साल शुरु हो जाता है। अब यह पर्व भारत मे ही नही बल्कि पूरी दुनिया मे बडे़ अत्साह के साथ मनाया जाता है।

भारत में दीपावली पाँच दिन तक मनायी जाती है। पहले दिन ‘काग तिहार’ पर, कौए को परमात्मा का दूत होने की मान्यता के कारण प्रसाद दिया जाता है। दूसरे दिन ‘कुकुर तिहार’ पर, कुत्तों को अपनी ईमानदारी के लिए भोजन दिया जाता है। काग और कुकुर तिहार के बाद ‘गाय तिहार’ या ‘गोरु तिहार’ में, गाय और बैल को सजाया जाता है। तीसरे दिन लक्ष्मी पूजा की जाती है। लक्ष्मी पूजा से पहले, मकान साफ ​​किया और सजाया जाता है; लक्ष्मी पूजा के दिन, तेल के दीयों को दरवाजे और खिड़कियों के पास जलाया जाता है। चौथे दिन को नए वर्ष के रूप में मनाया जाता है। सांस्कृतिक जुलूस और अन्य समारोहों को भी इसी दिन मनाया जाता है। पांचवे और अंतिम दिन को “भाई टीका” कहा जाता, भाई बहनों से मिलते हैं।  एक दूसरे को माला पहनाते व भलाई के लिए प्रार्थना करते हैं। माथे पर टीका लगाया जाता है। भाई अपनी बहनों को उपहार देते हैं और बहने उन्हें भोजन करवाती हैं।

दीपावली पाँच दिन की अवधि तक मनायी जाती है?

पहला दिन – पहले दिन को धनतेरस कहते हैं। दीपावली महोत्सव की शुरुआत धनतेरस से होती है। इसे धन त्रयोदशी भी कहते हैं। धनतेरस के दिन मृत्यु के देवता यमराज, धन के देवता कुबेर और आयुर्वेदाचार्य धन्वंतरि की पूजा का महत्व है। इसी दिन समुद्र मंथन में भगवान धन्वंतरि अमृत कलश के साथ प्रकट हुए थे और उनके साथ आभूषण व बहुमूल्य रत्न भी समुद्र मंथन से प्राप्त हुए थे। तभी से इस दिन का नाम ‘धनतेरस’ पड़ा और इस दिन बर्तन, धातु व आभूषण खरीदने की परंपरा शुरू हुई।

दुसरा दिन – दूसरे दिन को नरक चतुर्दशी, रूप चौदस और काली चौदस कहते हैं। इसी दिन नरकासुर का वध कर भगवान श्रीकृष्ण ने 16,100 कन्याओं को नरकासुर के बंदीगृह से मुक्त कर उन्हें सम्मान प्रदान किया था। इस उपलक्ष्य में दीयों की बारात सजाई जाती है। इस दिन को लेकर मान्यता है कि इस दिन सूर्योदय से पूर्व उबटन एवं स्नान करने से समस्त पाप समाप्त हो जाते हैं और पुण्य की प्राप्ति होती है।

तीसरा दिन – तीसरे दिन को ‘दीपावली’ कहते हैं। यही मुख्य पर्व होता है। दीपावली का पर्व विशेष रूप से मां लक्ष्मी के पूजन का पर्व होता है। कार्तिक माह की अमावस्या को ही समुद्र मंथन से मां लक्ष्मी प्रकट हुई थीं जिन्हें धन, वैभव, ऐश्वर्य और सुख-समृद्धि की देवी माना जाता है। अत: इस दिन मां लक्ष्मी के स्वागत के लिए दीप जलाए जाते हैं ताकि अमावस्या की रात के अंधकार में दीपों से वातावरण रोशन हो जाए।

दूसरी मान्यता के अनुसार इस दिन भगवान रामचन्द्रजी माता सीता और भाई लक्ष्मण के साथ 14 वर्षों का वनवास समाप्त कर घर लौटे थे। श्रीराम के स्वागत हेतु अयोध्यावासियों ने घर-घर दीप जलाए थे और नगरभर को आभायुक्त कर दिया था। तभी से दीपावली के दिन दीप जलाने की परंपरा है। 5 दिवसीय इस पर्व का प्रमुख दिन लक्ष्मी पूजन अथवा दीपावली होता है।

इस दिन रात्रि को धन की देवी माता लक्ष्मी का पूजन विधिपूर्वक करना चाहिए एवं घर के प्रत्येक स्थान को स्वच्छ करके वहां दीपक लगाना चाहिए जिससे घर में लक्ष्मी का वास एवं दरिद्रता का नाश होता है। इस दिन देवी लक्ष्मी, भगवान गणेश तथा द्रव्य, आभूषण आदि का पूजन करके 13 अथवा 26 दीपकों के मध्य 1 तेल का दीपक रखकर उसकी चारों बातियों को प्रज्वलित करना चाहिए एवं दीपमालिका का पूजन करके उन दीपों को घर में प्रत्येक स्थान पर रखें एवं 4 बातियों वाला दीपक रातभर जलता रहे, ऐसा प्रयास करें।

चौथा दिन – चौथे दिन अन्नकूट या गोवर्धन पूजा होती है। कार्तिक शुक्ल प्रतिपदा को गोवर्धन पूजा एवं अन्नकूट उत्सव मनाना जाता है। इसे पड़वा या प्रतिपदा भी कहते हैं। खासकर इस दिन घर के पालतू बैल, गाय, बकरी आदि को अच्छे से स्नान कराकर उन्हें सजाया जाता है। फिर इस दिन घर के आंगन में गोबर से गोवर्धन बनाए जाते हैं और उनका पूजन कर पकवानों का भोग अर्पित किया जाता है। इस दिन को लेकर मान्यता है कि त्रेतायुग में जब इन्द्रदेव ने गोकुलवासियों से नाराज होकर मूसलधार बारिश शुरू कर दी थी, तब भगवान श्रीकृष्ण ने अपनी छोटी अंगुली पर गोवर्धन पर्वत उठाकर गांववासियों को गोवर्धन की छांव में सुरक्षित किया। तभी से इस दिन गोवर्धन पूजन की परंपरा भी चली आ रही है।

पांचवां दिन – इस दिन को भाई दूज और यम द्वितीया कहते हैं। भाई दूज, पांच दिवसीय दीपावली महापर्व का अंतिम दिन होता है। भाई दूज का पर्व भाई-बहन के रिश्ते को प्रगाढ़ बनाने और भाई की लंबी उम्र के लिए मनाया जाता है। रक्षाबंधन के दिन भाई अपनी बहन को अपने घर बुलाता है जबकि भाई दूज पर बहन अपने भाई को अपने घर बुलाकर उसे तिलक कर भोजन कराती है और उसकी लंबी उम्र की कामना करती है।

इस दिन को लेकर मान्यता है कि यमराज अपनी बहन यमुनाजी से मिलने के लिए उनके घर आए थे और यमुनाजी ने उन्हें प्रेमपूर्वक भोजन कराया एवं यह वचन लिया कि इस दिन हर साल वे अपनी बहन के घर भोजन के लिए पधारेंगे। साथ ही जो बहन इस दिन अपने भाई को आमंत्रित कर तिलक करके भोजन कराएगी, उसके भाई की उम्र लंबी होगी। तभी से भाई दूज पर यह परंपरा बन गई।

दीपावली का महत्व क्या है?

पुराणों के अनुसार, त्रेतायुग में जब भगवान श्री राम रावण का वध कर वापस अयोध्या लौट थे तब वहां के लगों ने उनका स्वागत दीप जलाकर किया था। इसी स्वागत को हर वर्ष लोग दीपावली के त्योहार के रूप में मनाते हैं। दीपावली के दिन भगवान गणेश और माता लक्ष्मी की पूजा की जाती है। इस दिन घर के मुख्य द्वार पर रंगोली बनाई जाती है। साथ ही पूरे घर को दीपों से सजाकर मां लक्ष्मी के आगमन का स्वागत किया जाता है। भगवान गणेश और माता लक्ष्मी की पूजा के बाद खील और बतासे का प्रसाद बांटकर एक दूसरे को दीपावली की शुभकामनाएं दी जाती हैं। मान्यताओं के अनुसार ऐसा करने से मां लक्ष्मी घर में वास करती हैं। इससे व्यक्ति के घर में धन की कोई कमी नहीं रहती है।

दीपावली मनाने से लाभ:

  • छोटे-बड़े सभी व्यापारियों के लिए यह वक्त खास कमाई का होता हैं।
  • दीपावली से सभी तरह के व्यापार में तेजी आती हैं, क्यूंकि यह त्यौहार में हर चीज नयी आती है, लोग घर की साज-सज्जा, अपने कपड़ो, गहनों, खाने पीने सभी चीजों पर खर्च करते है।
  • दीपावली से आपसी प्रेम बढता है जिससे सम्बंधों में मिठास आती हैं।
  • साफ सफाई का बहुत महत्व हैं जिससे घरो तथा आस पास के परिवेश स्वच्छ होते हैं जो स्वास्थ्य के लिए लाभ कारी हैं.।
  • इस त्यौहार के बहाने साल में एक बार पुरे घर की सफाई हो जाती है, उनमे नया रंग करा दिया जाता है यह त्यौहार न हो तो ऐसा होना मुश्किल है।
  • कुटीर उद्योगों के लिए भी दीपावली का त्यौहार खुशियाँ लाता हैं मिट्टी का समान, साज सज्जा का समान कुटीर उद्योग द्वारा बनाये जाते है, जिनसे उनकी जीविका चलती है।

दीपावली मनाने से हानियाँ:

  • फटाखों के कारण प्रदूषण फैलता हैं।
  • दीपकों में फिजूल तेल जलता हैं।
  • अत्यधिक मिष्ठान और पकवान से स्वास्थ्य बिगड़ता हैं।
  • लाइट्स की सजावट के कारण विद्युत उर्जा की बरबादी होती हैं।
  • फिजूल पानी बहाया जाता हैं।
  • दिखावा के चक्कर में लोग फिजूल खर्च करते है।

जहाँ लाभ होते हैं वही हानियाँ भी होती हैं, दीपावली एक बड़ा त्यौहार हैं जो अपने साथ अपार ख़ुशी और प्रेम लेकर आता हैं पर सावधानी और विचार के साथ इसे मनाये तो यह हानि नहीं देता अपितु खुशहाली देता हैं।

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