क्लॉस्ट्रोफोबिया क्या है ? (What is claustrophobia)

what is Claustrophobia

बंद जगह में रहने पर कुछ लोगों में उत्पन्न मानसिक भय अथवा धुटन आदि क्लास्ट्रोर्फोबिया (Claustrophobia) कहलाता है। (Morbid fear of closed places) इस प्रकार के रोग होने पर रोगी किसी भी बंद वाले स्थान जैसे सिनेमााघर, काली गुफा, शौचालय, लिफ्ट आदि में जाने से कतराते हैं।

ऐसे रोगियों में अक्सर ऐसा देखा जाता है कि जैसे ही उनके सामने बस, ट्रेन, हवाई यात्रा की बात किया जाता है तो वे पसीने-पसीने हो जाते हैं तथा दिल की धड़कन कई गुना तेज दोड़ने लगती है। उन्हें ऐसा लगता है कि मानों कोई मारने की बात कर रहा हो। बंद आदि की बात सुनते ही उनके पंसीने के साथ दिल का धड़कन भी तेज हो जाता है तथा उनके पाँव भी ठंडे होने लगते हैं।

यह रोग पुरुषों की अपेक्षा महिलाओं में ज्यादा देखी जाती है। यदि किसी स्थान पर रोगी गयें हो और रोग के प्रभाव से वे अपने आप को चारों तरफ से धीरे हुए देखते हैं। तो वहाँ हमेशा के लिए जाना छोड़े देते हैं तथा इतना ही नहीं उस स्थान का नाम मात्रा लेने से वे सिहर कर अपने रोग का प्रभाव बताते हैं।

यह रोग बच्चों में भी पाये गये हैं। इस रोग के अन्दर वे बच्चे आते हैं जिनके माता-पिता इस मानसिक रोग से जूझ रहे हैं। इसके लक्षण कुछ विलग ढ़ग के होते हैं

क्लॉस्ट्रोफोबिया के लक्षण

  • यात्रा व किसी बंद स्थान के विचार मात्रा से रोगियों के हाँथ-पाँव ढीले पड़ जाना।
  • विचारोपरान्त रोगियों की मानसिक स्थिति परिवर्तीत हो उन्हें ऐसा अहसास होना कि अब हमारी जान चली जायेगी।
  • एकलेपन व अपने आप को उस स्थिति में असहाय महसूस करना।
  • चिकित्सक व अन्य व्यक्तियों द्वारा बंद जगह में फँसने वाले शब्दों से ही रोगी के दिल का ढड़कन तेज हो जाना।
  • यात्रा वृत्तात व विचार से ही रोगियों के पसीने-पसीने हो जाना। देखने से ऐसा लगता है जैसे रोगी नहीं बल्कि कोई कुकार्य कर फंस जाने का अहसास कर भयभीत हो रहा हो।

इस प्रकार के समस्याओं से ग्रसित व्यक्ति के हर तरह से हानि ही हानि होती है। उनका सामाजिक, आर्थिक, व्यावसायिक रूप से भी काफी नुकसान होता है। सही समय पर इनका यदि इलाज न हुआ तो कई प्रकार के नुकसान उठाने पड़ सकते हैं।

घर का एक मुख्य सदस्य ही यदि इस रोग से ग्रसित हो तो हम समझ ही सकते हैं कि कितना नुकसान होगा। इसलिए इस फोबिया अर्थात् भय सताने वाली बीमारी का इलाज उचित ढंग से करवाना चाहिए। ऐसे तो इसके समााधान हेतु कई चिकित्सा पद्धतियाँ हैं।

आयुर्वेद, होमियोपैथ, एलोपैथ आदि से भी इसका इलाज किया जाता है। तथा टय थैरेपी, बिहेवियर थेरैपी तथा काॅग्नीतिव बिहेवियर थेरैपी की मदद से भी इसका इलाज सम्भव है। नियमित ढंग से चिकित्सक द्वारा दिए गये औषधियों का सेवन भी करें और साथ में यदि हो सके तो विहंगम योग के प्रथम भूमि का साधन-अभ्यास करें।

विहंगम योग के साधन से नियमित अभ्यास से सर्व मानसिक रोग ठीक होते प्रामाण्य रूप में देखे गये हैं व देख रहे हैं साथ ही उचित ढंग से करते रहने से मानसिक के साथ-साथ शारीरिक, व बौद्धिक व्याधि भी समाप्त हो जाती है। इस रोग का सम्बन्ध सीधा मन से है अतः विहंगम योग की प्रथम साधना इसी मन के नियंत्रण हेतु किया जाता है। इसके निरन्तर अभ्यास से हर तरह से लाभ प्राप्त होता है। चाहे बात मनोवैज्ञानिक व्याधि की हो या फिर आध्यात्मिक सभी का समाधान सहज ढंग से हो जाता है।

तंग स्थान से डर लगने का कारण  (Claustrophobia Causes in Hindi)

क्लौस्ट्रफोबिया क्यों होता है?

क्लौस्ट्रफोबिया क्यों विकसित होता है इस बारे में ज्यादा जानकारी तो नहीं है, लेकिन ऐसा माना जाता है कि कई वातावरणीय कारक इस स्थिति को पैदा करने में काफी महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। ज्यादातर मामलों में क्लौस्ट्रफोबिया लोगों को बचपन या युवावस्था के दौरान ही विकसित होता है।

क्लौस्ट्रफोबिया प्रमस्तिष्कखंड (Amygdala) से संबंधित हो सकता है। प्रमस्तिष्कखंड मस्तिष्क का एक हिस्सा होता है, जो डर की प्रक्रिया को नियंत्रित करने का करता है। क्लौस्ट्रोफोबिया किसी आघात संबंधी दुर्घटना के कारण भी विकसित हो सकता है, जैसे:

  • किसी तंग या भीड़ वाली जगह पर फंस जाना या जबरदस्ती रखा जाना (अगवाह करना)
  • बचपन में किसी तंग या भीड़भाड़ वाली जगह पर दुर्व्यवहार होना या बच्चे को भयभीत किया जाना
  • किसी भीड़भाड़ वाली जगह से अपने माता-पिता या दोस्तों से अलग हो जाना

इसके अलावा यदि आपके परिवार में किसी व्यक्ति को क्लौस्ट्रफोबिया है और आप उसके साथ-साथ बड़े हुऐ हैं, तो आपको भी यह विकार होने की काफी संभावनाएं हो सकती हैं। यदि कोई बच्चा अपने परिवार के किसी सदस्य को तंग स्थान से डरते हुऐ देख लेता है, तो उसे भी ऐसी परिस्थितियों में डर लगने लग जाता है।

क्लौस्ट्रफोबिया से ग्रस्त व्यक्ति के मस्तिष्क में छोटी व भीड़भाड़ वाली जगहों के प्रति डर बैठ जाता है और ऐसी स्थिति में खतरा महसूस होने लगता है। खतरे के अनुसार शरीर प्रतिक्रिया देने लग जाता है।

क्लौस्ट्रफोबिया से बचाव  (Prevention of Claustrophobia in Hindi)

  • पैनिक अटैक होने इधर-उधर भागने की बजाए शांति से खड़े रहना। यदि इस दौरान आप गाड़ी चला रहे हैं, तो गाड़ी को सड़क के किनारे खड़ी कर लें और लक्षणों के जाने का इंतजार करें।
  • खुद को याद दिलाते रहें कि ये लक्षण कुछ ही समय के लिए हैं और जल्द ही चले जाएंगे। इस दौरान किसी ऐसी चीज पर ध्यान लगाने की कोशिश करें जो डरावनी ना लगे जैसे आते जाते या बात करते हुऐ लोगों को देखना।
  • धीरे-धीरे और गहरी सांस लें, तेजी से सांस लेने से स्थिति बदतर हो सकती है।
  • डर का मुकाबला करने की कोशिश करें और याद रखें कि यह वास्तव नहीं है, इस सकारात्मक चीजों के बारे में सोचने की कोशिश करें।
  • इसके अलावा योग, व्यायाम, मेडिटेशन (ध्यान) और अरोमाथेरेपी मसाज आदि जैसी दीर्घकालिक प्रक्रियाएं भी, क्लौस्ट्रफोबिया से ग्रस्त लोगों के लिए काफी मददगार हो सकती है।

क्लौस्ट्रफोबिया का इलाज (Claustrophobia Treatment in Hindi)

क्लौस्ट्रफोबिया के ज्यादातर मामलों का इलाज साइकोथेरेपी के द्वारा किया जाता है। विभिन्न प्रकार की काउन्सलिंग थेरेपी (परामर्श देना) भय का सामना करने में व्यक्ति की मदद कर सकती हैं और उसे बार-बार होने से रोकती हैं। आपको इस बारे में अपने डॉक्टर से बात कर लेनी चाहिए, कि किस तरह की थेरेपी आपके लिए सबसे बेहतर रहेगी। इलाज में निम्न में से किसी भी थेरेपी या इलाज प्रक्रिया को शामिल किया जा सकता है:

  1. कॉग्निटिव बिहेवियरल थेरेपी (CBT):
    इस प्रक्रिया में मरीज के दिमाग को फिर से प्रशिक्षण दिया जाता है, ताकि उन्हें तंग स्थानों से डर ना लगे। साथ ही साथ इस प्रक्रिया में धीरे-धीरे मरीज को तंग स्थानों में भेजा जाता है और उनके डर व चिंता से लड़ने में मदद की जाती है।
  2. रिलेक्सेशन और विजुअलाइजेंशन एक्सरसाइज:
    गहरी सांस लेना, ध्यान और मांसपेशियों को आराम प्रदान करने वाली रिलेक्सिंग तकनीक करना भी चिंता और नकारात्मक विचारों को दूर करने में मदद कर सकती है।
  3. ड्रग थेरेपी:
    डिप्रेशन व तनाव को कम करने वाली और आराम प्रदान करने वाली दवाएं भी क्लौस्ट्रफोबिया के लक्षणों को कम करने में मदद कर सकती है। हालांकि इससे क्लौस्ट्रफोबिया के अंदरुनी कारण का इलाज नहीं हो पाएगा।
  4. वैकल्पिक व पूरक दवाएं:
    कुछ सप्लीमेंट्स और प्राकृतिक उत्पाद हैं, जो चिंता व अन्य पैनिक विकार को कम करने में मदद कर सकते हैं। कुछ प्रकार के मालिश करने के तेल भी मार्केट में उपलब्ध हैं, शरीर को आराम प्रदान करके क्लौस्ट्रफोबिया के लक्षणों को कम करने में मदद ते करते हैं, जैसे लैवेंडर का तेल।

क्लौस्ट्रफोबिया का इलाज आमतौर पर लगभग 10 हफ्तों तक चलता है, जिसे एक हफ्ते में दो बार किया जाता है। उचित इलाज के साथ, क्लौस्ट्रफोबिया के लक्षणों को दूर करना संभव है।

क्लौस्ट्रफोबिया से क्या जटिलताएं हो सकती हैं?

तंग स्थान से भय होने की स्थिति का इलाज संभव है और व्यक्ति इससे ठीक हो सकते हैं। कुछ लोगों में उम्र बढ़ने के साथ-साथ क्लौस्ट्रफोबिया के लक्षण गायब होने लग जाते हैं। अगर इस स्थिति का इलाज न करवाया जाए और न ही यह अपने आप ठीक हो पाए, तो यह विकार मरीज के मानसिक स्वास्थ्य को गंभीर रूप से प्रभावित कर सकता है।

क्लौस्ट्रफोबिया से ग्रस्त व्यक्ति रोजाना की ज्यादा गतिविधियां कर पाते हैं, जैसे बाथरूम में अकेले जाना, लिफ्ट में जाना आदि। यहां तक कि कुछ गंभीर मामलों में मानसिक स्वास्थ्य के साथ-साथ व्यक्ति का शारीरिक स्वास्थ भी गंभीर रूप से प्रभावित हो जाता है।

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