ब्‍लॉकचेन क्या है?और कैसे काम करता है

what is blockchain in hindi

Blockchain क्या है?और कैसे काम करता है?

बिटकोइन के पीछे की तकनीक क्या है? यदि हाँ तब आपको ये Post ब्लॉकचेन तकनीक क्या है जरुर पसदं आएगी. क्यूँ की बिटकोइन का सम्बन्ध ब्लॉकचेन से है इसलिए आपको ब्लॉकचेन के विषय में जानना होगा, ये कैसे काम करता है. जिस प्रकार हज़ारों-लाखों कंप्यूटरों को आपस में जोड़कर इंटरनेट का अविष्कार हुआ, ठीक उसी प्रकार डाटा ब्लॉकों (आँकड़ों) की लंबी श्रृंखला को जोड़कर उसे ब्लॉकचेन का नाम दिया गया है।

ब्लॉकचेन तकनीक तीन अलग-अलग तकनीकों का समायोजन है, जिसमें इंटरनेट, पर्सनल ‘की’ (निजी कुंजी) की क्रिप्टोग्राफी अर्थात् जानकारी को गुप्त रखना और प्रोटोकॉल पर नियंत्रण रखना शामिल है।
क्रिप्टोग्राफी की सुरक्षित श्रृंखला पर सर्वप्रथम 1991 में स्टुअर्ट हैबर और डब्ल्यू. स्कॉट स्टोर्नेटा ने काम किया। इसके अगले वर्ष यानी 1992 में इन दोनों के साथ बायर भी आ मिले और इसके डिज़ाइन में सुधार किया, जिसकी वज़ह से ब्लॉक्स को एकत्रित करने का काम आसान हो गया।
ब्लॉकचेन एक ऐसी तकनीक है जिससे बिटकॉइन तथा अन्य क्रिप्टो-करेंसियों का संचालन होता है। यदि सरल शब्दों में कहा जाए तो यह एक डिजिटल सार्वजनिक बही-खाता’ (Public Ledger) है, जिसमें प्रत्येक लेन-देन का रिकॉर्ड दर्ज़ किया जाता है।
ब्लॉकचेन में एक बार किसी भी लेन-देन को दर्ज करने पर इसे न तो वहाँ से हटाया जा सकता है और न ही इसमें संशोधन किया जा सकता है।
ब्लॉकचेन के कारण लेन-देन के लिये एक विश्वसनीय तीसरी पार्टी जैसे-बैंक की आवश्यकता नहीं पड़ती।
इसके अंतर्गत नेटवर्क से जुड़े उपकरणों (मुख्यतः कंप्यूटर की श्रृंखलाओं, जिन्हें नोड्स कहा जाता है) के द्वारा सत्यापित होने के बाद प्रत्येक लेन-देन के विवरण को बही-खाते में रिकॉर्ड किया जाता है।

कैसे काम करती है ब्लॉकचेन तकनीक?

  • माना जाता है कि ब्लॉकचेन में तमाम उद्योगों की कार्यप्रणाली में भारी बदलाव लाने की क्षमता है। इससे प्रक्रिया को ज़्यादा लोकतांत्रिक, सुरक्षित, पारदर्शी और सक्षम बनाया जा सकता है।
  • ब्लॉकचेन एक ऐसी प्रौद्योगिकी है जो सुरक्षित एवं आसानी से सुलभ नेटवर्क पर लेन-देनों का एक विकेंद्रीकृत डाटाबेस तैयार करती है।
  • इस वर्चुअल बही-खाते में लेन-देन के इस साझा रिकॉर्ड को नेटवर्क पर स्थित ब्लॉकचेन को इस्तेमाल करने वाला कोई भी व्यक्ति देख सकता है।
  • ब्लॉकचेन डाटा ब्लॉकों (आँकड़ों) की एक ऐसी श्रृंखला है जिसके प्रत्येक ब्लॉक में लेन-देन का एक समूह समाविष्ट होता है।
  • ये ब्लॉक एक-दूसरे से इलेक्ट्रॉनिक रूप से जुड़े होते हैं तथा इन्हें कूट-लेखन (Encryption) के माध्यम से सुरक्षित रखा जाता है।
  • यह तकनीक सुरक्षित है तथा इसे हैक करना मुश्किल है। इसीलिये साइबर अपराध और हैकिंग को रोकने के लिये यह तकनीक सुरक्षित मानी जा रही है।
  • इसके अंतर्गत नेटवर्क से जुड़ी कंप्यूटर की श्रृंखलाओं, जिन्हें नोड्स कहा जाता है) के द्वारा सत्यापित होने के बाद प्रत्येक लेन-देन के विवरण को बही-खाते में रिकॉर्ड किया जाता है।

ब्लॉकचेन की प्रमुख विशेषताएँ

  • विकेंद्रीकरण और पारदर्शिता ब्लॉकचेन तकनीक की सबसे महत्त्वपूर्ण व्यवस्था है, जिसकी वज़ह से यह तेज़ी से लोकप्रिय और कारगर साबित हो रही है।
  • ब्लॉकचेन एक ऐसी तकनीक है जिसे वित्तीय लेन-देन (Financial Transactions) रिकॉर्ड करने के लिये एक प्रोग्राम के रूप में तैयार किया गया है।
  • यह एक डिजिटल सिस्टम है, जिसमें इंटरनेट तकनीक बेहद मज़बूती के साथ अंतर्निहित है।
  • यह अपने नेटवर्क पर समान जानकारी के ब्लॉक को संग्रहीत कर सकता है।
  • ब्लॉकचेन डेटाबेस को वितरित करने की क्षमता रखता है अर्थात् यह एक डिस्ट्रिब्यूटेड नेटवर्क की तरह कार्य करता है।
  • डेटाबेस के सभी रिकॉर्ड किसी एक कंप्यूटर में स्टोर नहीं होते, बल्कि हज़ारों-लाखों कंप्यूटरों में इसे वितरित किया जाता है।
  • ब्लॉकचेन का हर एक कंप्यूटर हर एक रिकॉर्ड के पूरे इतिहास का वर्णन कर सकता है। यह डेटाबेस एन्क्रिप्टेड होता है।
  • ब्लॉकचेन सिस्टम में यदि कोई कंप्यूटर खराब भी हो जाता है तो भी यह सिस्टम काम करता रहता है।
  • जब भी इसमें नए रिकार्ड्स को दर्ज करना होता है तो इसके लिये कई कंप्यूटरों की स्वीकृति की ज़रूरत पड़ती है।
  • ब्लॉकचेन को यूज़र्स का ऐसा ग्रुप आसानी से नियंत्रित कर सकता है, जिसके पास सूचनाओं को जोड़ने की अनुमति है और वही सूचनाओं के रिकॉर्ड को संशोधित भी कर सकता है।
  • इस तकनीक में बैंक आदि जैसे मध्यस्थों की भूमिका समाप्त हो जाती है और व्यक्ति-से-व्यक्ति (P-to-P) सीधा संपर्क कायम हो जाता है।
  • इससे ट्रांजेक्शंस में लगने वाला समय तो कम होता ही है, साथ ही गलती होने की संभावना भी बेहद कम रहती है।

ब्लॉकचेन अर्थव्यवस्था कैसी है?

भारत सरकार यथासंभव प्रयास कर रही है कि अर्थव्यवस्था में डिजिटल लेन-देन को बढ़ावा देकर कैशलेस अर्थव्यवस्था की ओर कदम बढाए जाएं।  इंटरनेट ने वित्तीय लेनदेन का परिदृश्य काफी हद तक बदल दिया है और नई तकनीक के प्रयोग से नकद लेन-देन का चलन पहले की अपेक्षा काफी कम हुआ है। कार्ड या किसी भी अन्य डिजिटल माध्यम से एक खाते से दूसरे में पैसे भेजना, किसी बिल का भुगतान करना, किराने या दवा की दुकान पर भुगतान करना आदि बेहद आसान हो गया है। भविष्य में ब्लॉकचेन तकनीक का प्रयोग कर इन सब को और मज़बूती देना संभव हो सकता है, लेकिन इसके लिये सही दिशा में सही समय पर सही कदम उठाना ज़रूरी होगा।

ब्लॉकचेन की सुरक्षा चिंताएँ भी जुड़ी हैं

  • इंटरनेट और डिजिटल तकनीक के मेल ने लेन-देन और सूचनाओं के आदान-प्रदान के तरीकों को पूरी तरह से बदल दिया है। इसमें ब्लॉकचेन तकनीक महत्त्वपूर्ण भूमिका निभा रही है।
  • इससे कई तरह की आशंकाओं और प्रश्नों को बल मिला है, जैसे-डिजिटल भुगतान या सूचना का लेन-देन कब किया गया?
  • इसके अलावा हस्तांतरण की सुरक्षा, स्थानांतरणण की वैधता की जाँच-परख करने का सवाल भी कम बड़ा नहीं है।
  • निजी जानकारियाँ सुरक्षित रखने के मामले में तथा जहाँ जानकारियों या सूचनाओं के लीक होने का खतरा हो, वहाँ ब्लॉकचेन तकनीक का इस्तेमाल नहीं होता।
  • भारत में डिजिटल लेन-देन की गति विकसित देशों की तुलना में काफी कम है, लेकिन इससे होने वाली धोखाधड़ी के मामले लगभग रोज़ सामने आते हैं।
  • डेबिट/क्रेडिट कार्ड और बैंक खातों की हैकिंग भी होती रहती है तथा देश में इसकी रोकथाम के लिये कोई मज़बूत वैधानिक व्यवस्था नहीं है।
  • भारत में नागरिक सूचनाओं की चोरी, साइबर उत्पीड़न, फ्रॉड भुगतान, गैर-कानूनी लेन-देन और औद्योगिक जासूसी की घटनाएँ भी होती रहती हैं।
  • इस दृष्टिकोण से भी ब्लॉकचेन तकनीक तब तक लाभकारी नहीं होगी, जब तक कि इसके लिये मज़बूत तकनीकी प्रतिरोधी व्यवस्था नहीं बना ली जाती।
  • भारत में ब्लॉकचेन को लेकर कोई स्पष्ट नीति नहीं है और न ही कोई स्पष्ट विनियामक ढाँचा है।
  • वित्त मंत्री अरुण जेटली ने अपने इस वर्ष के बजट भाषण में ब्लॉकचेन तकनीक पर विचार करने के लिये एक समिति गठित करने की बात कही है।
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