कंप्यूटर नेटवर्क क्या है? और यह कैसे काम करता है।

what is computer network

परस्पर जुड़े हुए दो या दो से अधिक कम्प्यूटर या अन्य डिजिटल युक्तियों (Digital Devices) और उन्हें जोडने वाली व्यवस्था को कंप्यूटर नेटवर्क कहते हैं। ये कम्प्यूटर आपस में इलेक्ट्रोनिक सूचना (Information) का आदान-प्रदान क‍र सकते हैं और आपस में तार या बेतार (Wired या Wireless) से जुडे रहते हैं। सूचना का यह आवागमन खास परिपाटी से होता है, जिसे प्रोटोकॉल (Protocol) कहते हैं और नेटवर्क के प्रत्येक कम्प्यूटर को इसका पालन करना पड़ता है। कई नेटवर्क जब एक साथ जुड़ते हैं तो इसे इंटरनेटवर्क कहते हैं जिसका संक्षिप्त रूप इन्टरनेट या अंतर्जाल (Internet) काफ़ी प्रचलित है। अलग अलग प्रकार की सूचनाओं के कार्यकुशल आदान-प्रदान के लिये विशेष प्रोटोकॉल हैं।

सूचनाओं के आदान प्रदान के लिए एनालॉग तथा डिजिटल विधियों का प्रयोग होता है। नेटवर्क के उपादानों में तार, हब, स्विच, राउटर आदि उपकरणों का नाम लिया जा सकता है। स्थानीय कम्प्यूटर नेटवर्किंग में बेतार नेटवर्क (Wireless Network) का प्रभाव बढ़ता जा रहा है। कम्प्यूटर नेटवर्क का उपयोग इलेक्ट्रानिक संचार में किया जाता है। इलेकट्रानिक की सहायता से सूचना को एक स्थान से दूसरे स्थान पर प्रेषित करने की प्रक्रिया को दूरसंचार (Telecommunications) कहते है और एक या एक से अधिक कम्प्यूटर और विविध प्रकार के टर्मिनलों के बीच आंकड़ों को भेजना या प्राप्त करना डाटा संचार (Data Transfer) कहलाता है।

कम्प्यूटर नेटवर्क मूल अंग क्या है?

    • टर्मिनल
    • दूरसंचार प्रोसेसर
    • दूरसंचार चैनल
    • कम्प्यूटर
    • दूरसंचार साफ्टवेयर

नेटवर्क का इतिहास (History of Network)

1960 के दशक के दौरान पॉल बैरन एंड डोनाल्ड डेविस नें दो कम्प्युटरों के बीच जानकारी साझा (Share) करने के उद्देश्य से पैकेट स्विचिंग (Packet Switching) की ओर से कार्य प्रारंभ किया। और 1965 में इलेक्ट्रॉनिक टेलीफोन स्विच लॉच किया गया। जिसका उपयोग कम्प्युटर को नियंत्रित करने के लिए किया गया था।

1969 में ARPANET (Advance Research Project Agency Network) के पहले चार नोड्स मुख्य विश्वविद्यालयों के बीच 50kbit/s सर्किट के उपयोग से जुडे हुए थे। इस तरह अर्पानेट के बढते शोध और विकास ने सबसे मजबूत नेटवर्क अर्थात इंटरनेट का निर्माण किया।

1976 में ARCNET (टोकन-पार्सिंग) नेटवर्क बनाया गया। जिसे उपकरणों को शेयर करने के लिए इस्तेमाल किया जाता था। इन्टरनेट के विषय में 1973 में शोध किया गया और जुलाई 1976 में रोबोट मेटाकाफ और डेविड बोग्स ने अपने पेपर बेस (Distributed Packet Switching for Local Computer Network) को प्रकाशित कर इस नेटवर्क के सिद्धांत के बारे में बताया।

इंटरनेट के बढते विकास के कारण सन 1995 में विदेशी की ट्रांसमिशन गति 10 MBPS से बढकर 100 MBPS हो गई थी। और 1998 में यह बढकर एक गीगाबाईट (GigaByte – GBPS) हो चुकी थी। वर्तमान समय में इन्टरनेट को LAN के नाम से भी जाना जाता है।

नेटवर्क के प्रकार (Types of Network)

  1. LAN (Local Area Network)

LAN पूरा नाम Local Area Network है यह एक ऐसा नेटवर्क है जिसका प्रयोग दो या दो से अधिक कंप्यूटर को जोड़ने के लिए किया जाता है| लोकल एरिया नेटवर्क स्थानीय स्तर पर काम करने वाला नेटवर्क है इसे संक्षेप में लेन (LAN) कहा जाता हैं। यह एक ऐसा कंप्यूटर नेटवर्क है जो स्थानीय इलाकों जैसे- घर, कार्यालय, या भवन समूहों को कवर करता है।

    • यह एक कमरे या एक बिल्डिंग तक सीमित रहता है।
    • इसकी डाटा हस्तांतरण की गति (Data Transfer Speed) अधिक होती है।
    • इसमें बाहरी नेटवर्क को किराये पर नहीं लेना पड़ता है।
    • इसमें डाटा सुरक्षित रहता है।
    • इसमें डाटा को व्यवस्थित करना आसान होता है।
  1. MAN (Metropolitan Area Network)

MAN पूरा नाम “Metropolitan Area Network” हैं यह एक ऐसा उच्च गति वाला नेटवर्क है जो आवाज, डाटा और इमेज को 200 मेगाबाइट प्रति सेकंड या इससे अधिक गति से डाटा को 75 कि.मी. की दूरी तक ले जा सकता है। यह लेन (LAN) से बड़ा, तथा वेन (WAN) से छोटा नेटवर्क होता है। इस नेटवर्क के द्वारा एक शहर को दूसरे शहर से जोड़ा जाता है।

इसके अंतर्गत दो या दो से अधिक लोकल एरिया नेटवर्क एक साथ जुड़े होते हैं। यह एक शहर की सीमाओ के भीतर स्थित कंप्यूटर नेटवर्क होता हैं। राउटर, स्विच और हब्स मिलकर एक मेट्रोपोलिटन एरिया नेटवर्क का निर्माण करता हैं।

    • इसकी गति उच्च होती है।
    • यह 75 कि.मी. की दूरी तक फैला रहता है।
    • इसका रखरखाव कठिन होता है।

3. WAN (Wide Area Network)

WAN पूरा नाम “Wide Area Network” होता है। यह क्षेत्रफल की द्रष्टि से बहुत बड़ा नेटवर्क होता है। यह नेटवर्क न केवल एक बिल्डिंग या एक शहर तक सीमित रहता है बल्कि यह पूरे विश्व को जोड़ने का कार्य करता है अर्थात् यह सबसे बड़ा नेटवर्क होता है इसमें डाटा को सुरक्षित भेजा और प्राप्त किया जाता है |

इस नेटवर्क मे कंप्यूटर आपस मे लीज्ड लाइन या स्विच सर्किट के द्वारा जुड़े रहते हैं। इस नेटवर्क की भौगोलिक परिधि बड़ी होती है जैसे पूरे शहर, देश या महाद्वीप मे फेले नेटवर्क का जाल हैं। बैंको के ATM सुविधा वाईड एरिया नेटवर्क का उदाहरण हैं।

    • यह तार रहित नेटवर्क होता है।
    • इसमें डाटा को संकेतो (Signals) या उपग्रह (Satelight) के द्वारा भेजा और प्राप्त किया जा सकता है।
    • यह सबसे बड़ा नेटवर्क होता है।
    • इसके द्वारा हम पूरी दुनिया में डाटा ट्रान्सफर कर सकते है।

नेटवर्क में इस्तेमाल होने वाले डिवाइस (Network device)

1. HUB

हब को नेटवर्क हब भी कहा जाता है। यह एक सामान्य नेटवर्किंग डिवाइस होता है जिसका इस्तेमाल LAN के सभी भागो (Segments) को कनेक्ट करने के लिए होता है। हब में कई पोर्ट होते हैं, जब एक पोर्ट के पास कोई भी पैकेट (सूचनाओ का समूह) पहुचती है तो वह सभी पोर्ट के पास कॉपी कर देता है। ताकि जितने भी लैन सेगमेंट के द्वारा हब से जुड़े हों वे सब इस पैकेट को देख सकें। हब दो प्रकार के होते हैं सक्रिय हब और निष्क्रिय हब।hub image

2. Switch

नेटवर्क स्विच एक कंप्यूटर नेटवर्किंग डिवाइस होता है जो की पैकेट स्विचिंग के द्वारा उपकरणों को कंप्यूटर नेटवर्क पर जोड़ने का काम करता है जिसके द्वारा स्रोत डिवाइस (Source Device) से डेटा भेजा जाता है और उसके बाद डेटा ऑफलाइन होता है फिर गंतव्य डिवाइस (Destination Device) के पास प्राप्त होता है। नेटवर्क स्विच को स्विचिंग हब, ब्रिजिंग हब और मैक ब्रिज भी कहा जाता है।

switch image e1603300838421यह जानकारी के पैकेट में मैक एड्रेस (MAC Address – Media Access Control Address) के अनुसार ports के बीच डेटा को फ़िल्टर करता है Switch डेटा को फ़िल्टर करके यह पता लगाने की कोशिश करता है की इस डेटा को किस पोर्ट के पास भेजना है। स्विच के पास कई पोर्ट होते हैं और यह सभी पोर्ट के मैक एड्रेस (मीडिया एक्सेस कंट्रोल एड्रेस) को टेबल में स्टोर करके रखता है ताकि जानकारी को मैक एड्रेस के अनुसार उस पोर्ट तक सीधे भेजा जा सके। यह सभी पोर्ट के पास डेटा को कॉपी नहीं करता है इसलिए इसे इंटेलिजेंट डिवाइस कहा जाता है।

3. Router

राउटर एक नेटवर्किंग डिवाइस होता है जो की कंप्यूटर नेटवर्क के बीच डेटा को फॉरवर्ड करने का काम करता है। आम तौर पर, राउटर अलग-अलग प्रकार के नेटवर्क को कनेक्ट करने का काम करता है। राउटर ट्रैफिक निर्देशन के रूप में काम करता है मतलब की यह मार्ग बताने का काम करता है। इन्टरनेट पर जितने भी डेटा भेजें जाते हैं वे सभी डेटा एक पैकेट के रूप में होते हैं। जब सूचना का पैकेट एक राउटर से दुसरे राऊटर में नेटवर्क के द्वारा फॉरवर्ड किया जाता है तो एक इंटरनेटवर्क का गठन होता है जब तक डेटा अपने गंतव्य नोड(destination node) तक पहुँच नहीं जाये। router image

जब सूचना का कोई भी पैकेट राउटर के किसी लाइन में आता है, तो सबसे पहले राउटर उस सूचना के नेटवर्क पते (network address) को पढता है ताकि उसके गंतव्य नोड(destination node) के बारे में पता लगाया जा सके और उसके बाद उसको गंतव्य नोड (destination node) तक पहुँचाने के लिए अगले नेटवर्क में स्थानांतरण कर देता है।

कंप्यूटर नेटवर्क के लाभ (Advantages of Computer Network)

  • प्रिंटर जैसे उपकरणों को साझा करने से पैसे की बचत होती है।
  • साइट (सॉफ्टवेयर) लाइसेंस कई स्टैंडअलोन लाइसेंस खरीदने की तुलना में सस्ता होने की संभावना है।
  • फ़ाइलें आसानी से उपयोगकर्ताओं के बीच साझा की जा सकती हैं।
  • नेटवर्क उपयोगकर्ता ईमेल और इंस्टेंट मैसेंजर द्वारा संवाद कर सकते हैं।
  • सुरक्षा अच्छी है – उपयोगकर्ता स्टैंड-अलोन मशीनों के विपरीत अन्य उपयोगकर्ताओं की फ़ाइलों को नहीं देख सकते हैं।
  • डेटा बैकअप के लिए आसान है क्योंकि सभी डेटा फ़ाइल सर्वर पर संग्रहीत है।

कंप्यूटर नेटवर्क के नुकसान (Disadvantages of Computer Network)

  • नेटवर्क केबलिंग और फ़ाइल सर्वर खरीदना महंगा हो सकता है।
  • एक बड़े नेटवर्क का प्रबंधन जटिल है, प्रशिक्षण की आवश्यकता होती है और एक नेटवर्क प्रबंधक को आमतौर पर नियोजित करने की आवश्यकता होती है।
  • यदि फ़ाइल सर्वर टूट जाता है तो फ़ाइल सर्वर पर मौजूद फाइलें अप्राप्य हो जाती हैं। यदि यह एक अलग सर्वर पर है तो भी ईमेल काम कर सकता है। कंप्यूटर अभी भी उपयोग किए जा सकते हैं लेकिन अलग-थलग हैं।
  • वायरस पूरे कंप्यूटर नेटवर्क में अन्य कंप्यूटरों में फैल सकते हैं।
  • हैकिंग का खतरा है, विशेष रूप से व्यापक क्षेत्र नेटवर्क के साथ। इस तरह के दुरुपयोग को रोकने के लिए सुरक्षा प्रक्रियाओं की आवश्यकता होती है, जैसे एक फ़ायरवॉल।
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