सरसों के तेल से होने वाले फ़ायदे और नुकसान क्या है। (What Are The Advantages And Disadvantages Of Mustard Oil)

सरसों के तेल से होने वाले फ़ायदे और नुकसान क्या है।

भारतीय घरों में सरसों के तेल को किचन से लेकर स्किन तक के लिए इस्तेमाल किया जाता है। कई जगह पर सरसों के तेल को कड़वा तेल भी कहा जाता है। इसको सबसे ज्यादा खाना बनाने में इस्तेमाल किया जाता है। दरअसल सरसों का तेल सेहत और सुंदरता दोनों के लिए बहुत फायदेमंद माना जाता है। सरसों के तेल को आयुर्वेद में कई दवाओं में भी इस्तेमाल किया जाता है। सरसों के तेल को शरीर के घाव भरने मे, जोड़ों के दर्द या कान दर्द जैसी समस्याओं में खूब इस्तेमाल किया जाता है। असल में सरसों के तेल में बहुत से ऐसे तत्व पाए जाते है, जो सेहत के लिए फायदेमंद माने जाते हैं, लेकिन इसके इतने फायदे होने के बावजूद कुछ नुकसान भी हैं। सरसों के तेल से होने वाले फ़ायदे और नुकसान क्या है? आज हम इस आर्टिकल मे पढेंगे।

सरसों का तेल हमारे खान-पान का अहम हिस्सा है। यह शरीर के लिए बहुत लाभदायक होता है। शरीर में जोड़ों के दर्द या कान दर्द जैसी चीजों में सरसों का तेल बहुत मददगार माना जाता है। सरसों के तेल का आयुर्वेद और कई दवाओं में भी इस्तेमाल किया जाता है। इसके बावजूद सरसों के तेल का ज्यादा इस्तेमाल नुकसान भी पहुंचा सकता है। इसके फायदे और कई नुकसान भी है।

सरसों के पौधों के बीजों से सरसों का तेल निकलता है। यह मोनोअनसैचुरेटेड फैटी एसिड में समृद्ध है, जो हृदय रोग के विकास की संभावना को कम करने के लिए जाना जाता है। हालांकि, सरसों के तेल के नुकसान भी कई हैं। इस तेल के साथ खाना पकाने से गंभीर खतरा पैदा हो सकता है, खासकर बच्चों के लिए यह तेल हानिकारक है।

सरसों का तेल क्या है? (What Is Mustard Oil)

सरसों के तेल को सरसों (पौधा) के बीजों को पीस कर निकाला जाता है। इसका वैज्ञानिक नाम ब्रेसिका जुनसा है, जिसे विभिन्न भाषाओं में अलग-अलग नामों से जाना जाता है। अंग्रेजी में इसे मस्टर्ड, तेलुगु में अवन्यून, मलायम में कदुगेना और मराठी में मोहरीच भी कहा जाता है। सरसों के बीज भूरे, लाल और पीले रंग के होते है। मशीनों की मदद से इनमें से तेल निकाला जाता है। भारत में इसका प्रचलन ज्यादा है। और प्रतिदिन बनने वाले भोजन में भी इसका इस्तेमाल किया जाता है। यह तेल जायका बढ़ाने के साथ-साथ भोजन को पौष्टिक भी बनाता है।

सरसों के तेल के बारे में तथ्‍य:

  • वानस्‍पतिक नाम: ब्रैसिका जन्सिया
  • कुल: ब्रैसिकेसी
  • सामान्‍य नाम: सरसों का तेल
  • संस्‍कृत नाम: सर्षप तेल
  • उपयोगी भाग: सरसों के बीजों से सरसों का तेल तैयार किया जाता है।
  • भौगोलिक विवरण: पूर्वी और उत्तर भारत, बांग्‍लादेश एवं नेपाल में खाना पकाने के लिए सरसों के तेल का इस्‍तेमाल किया जाता है।
  • रोचक तथ्‍य: विभिन्‍न त्‍योहारों और अवसरों पर सरसों के तेल का इस्‍तेमाल किया जाता है। भारत में सरसों के तेल को पारंपरिक और सांस्‍कृतिक महत्‍व दिया जाता है। भारत मे दीपावली पर सरसो के तेल से दीप (दिये) जलाए जाते है।
सरसों के तेल में मौजूद पौष्टिक तत्व कोन कोनसे है? (What Are The Nutritional Elements Present In Mustard Oil)

यह मात्रा आप को सिर्फ 2 ग्राम सरसों के तेल में आप को मिलती है। इसके अलावा जितना आप ज्यादा तेल इस्तेमाल करते हैं। उसमें इस हिसाब से उसकी मात्रा बढ़ जाएगी तो देखिए। सरसों के तेल मे मोजूद पोस्टिक तत्व।

  • प्रति 100 ग्राम राशि
  • कैलोरी 884
  • संतृप्त वसा 12 जी 60%
  • कुल वसा 100 ग्राम 153%
  • मोनोअनस्यूटेटेड वसा 59 ग्राम
  • विटामिन बी -6 0% विटामिन बी -12 0%
  • पॉलीअनसेचुरेटेड वसा 21 ग्राम
ऊर्जा884 kcal
टोटल लिपिड (फैट)100 g
फैटी एसिड, टोटल सैचुरेटेड11.582 g
फैटी एसिड, टोटल मोनोअनसैचुरेटेड59.187 g
फटी एसिड, टोटल पोलीअनसैचुरेटेड21.23 g
सरसों के तेल का दिमाग पर क्या असर पड़ता है। (What Is The Effect Of Mustard Oil On The Brain)

रोजाना दो चम्मच राई का तेल खाने से आपकी याददाश्त और सीखने की क्षमता पर असर पड़ सकता है, साथ ही अल्जाइमर्स रोग से पीड़ित लोगों का इससे वजन भी बढ़ सकता है। एक शोध में यह दावा किया गया है। चूहों पर किए गए इस अध्ययन में कहा गया कि वेजिटेबल ऑयल के लंबे समय तक सेवन से दिमाग को नुकसान पहुंच सकता है।

दरअसल मे राई के तेल को स्वास्थ्यकारी खाद्य तेल माना जाता है। जिन चूहों को राई के तेल में पकाए गए खाद्य पदार्थ दिए गए, उनका वजन सामान्य भोजन करने वाले चूहों की तुलना में ज्यादा पाया गया। राई के तेल में अक्सर सब्जियां तली जाती हैं। शोधकर्ताओं का दावा है कि लगातार छह महीनों से अधिक समय तक राई के तेल का सेवन करने से कामकाजी लोगों के याददाश्त को नुकसान पहुंचता है, साथ ही अल्पकालिक याददाश्त के साथ ही सीखने की क्षमता को भी नुकसान पहुंचता है।

अमेरिका के पेन्सिलवेनिया में स्थित टेंपल विश्वविद्यालय के प्रोसेसर डोमेनिको प्रेटिको ने कहा, “दरअसल मे राई का तेल एक वेजिटेबल तेल है, फिर भी हमें इसे स्वास्थ्यवर्धक कहने से पहले थोड़ी सावधानी बरतनी चाहिए।” प्रेटिको ने कहा है। “एक शोध के निष्कर्षो से पता चलता है। कि राई के तेल को अन्य तेलों के मुक़ाबले गुणकारी नहीं माना जाना चाहिए।”

सर्दियों में शरीर पर सरसों के तेल का क्या असर होगा। (What Will Be The Effect Of Mustard Oil On The Body In Winter)
  1. राइनाइटिस एलर्जी
    कई बार ऐसा हुआ है कि सरसों का तेल ज़्यादा खाने या बॉडी पर लगाने से राइनाइटिस का खतरा पैदा हो जाता है। जिसमें म्यूकस मेम्ब्रेन यानी कि श्लेष्मा झिल्ली में सूजन आ जाती है। और कुछ इस तरह के लक्षण सामने आने लगते हैं।
    – खांसी
    – लगातार छींकना
    – भरी हुई नाक
    – नाक से पानी टपकना
    हालांकि सरसों का तेल लगाने के तुरंत बाद ये कई लोगों को होता है पर अगर ये लक्षण अपने आप ठीक न हों और बार-बार आपको परेशान करें तो, इसे नज़रअंदाज़ न करें।
  2. जलन
    सरसों के तेल में एक और हानिकारक केमिकल कंपाउंड होता है, जिसे एलिल आइसोथियोसाइनेट कहा जाता है। ये काफी स्ट्रांग और रिएक्टिव होता है। इसलिए जब कभी सरसों का तेल लगाने के बाद शरीर में जलन महसूस होती है। तो उसके पीछे की वजह यही केमिकल होता है।
  3. त्वचा को नुकसान
    सरसों के तेल को रोजाना हमारे बॉडी पर लगाना आपकी स्किन के लिए सही नहीं है। क्योंकि ये आपकी स्किन के पोर्स को ब्लॉक कर सकता है। इसके आलावा, ये आपकी स्किन को एपिडर्मिस के ज़रिये डीहाइड्रेट कर, एपिडर्मल केराटिनोसाइट्स के स्ट्रक्चर को बदल सकता है। जिसकी वजह से आपकी स्किन पर फफोले और खुजली वाले दाने होने का खतरा बढ़ जाता है।
सरसों के तेल के फायदे क्या है? (Benefits Of Mustard Oil In Hindi)
  1. जोड़ों के दर्द में सरसों के तेल की मालिश करने से जोड़ों के दर्द को कम किया जा सकता है। गठिया और मांसपेशियों में होने वाले दर्द से निजात पाने के लिए भी सरसों के तेल का इस्तेमाल फायदेमंद होता है क्योंकि सरसों के तेल में मौजूद ओमेगा-3 फैटी एसिड, जो जोड़ों के दर्द और गठिया की समस्या को कम करने में सहायक होते है।
  2. सरसों का तेल त्वचा को अल्ट्रावायलेट किरणों और पॉल्यूशन से बचता है। सरसों के तेल में विटामिन-ई की भरपूर मात्रा पायी जाती है, जो त्वचा को अंदर से पोषण प्रदान कर त्वचा में नमी बनाये रखने में सहायक होती है। सरसों के तेल में हल्दी और बेसन को मिलाकर चेहरे पर लगाने से चेहरे की गंदगी साफ होती है, जिससे त्वचा पर निखार आने लगता है।
  3. भूख न लगने या कम भूख लगने की समस्या में सरसों के तेल से बने भोजन का सेवन करें। सरसों का तेल हमारे पेट में ऐपिटाइजर के रूप में कार्य करता है, जिससे भूख खुलने लगती है। साथ ही सरसों का तेल हमारी पाचन शक्ति के लिए भी लाभदायक होता है।
  4. अस्थमा से पीड़ित लोगों के लिए सरसों के तेल का सेवन लाभदायक होता है। सरसों में पाए जाने वाले वाला मैग्नीशियम ,जो अस्थमा सी पीड़ित लोगों के लिए फायदेमंद होता है। अस्थमा के दौरे के समय, सरसों के तेल से सीने की मालिश करने पर आराम मिलता है।
  5. दांतों के दर्द को कम करने के लिए सरसों का तेल फायदेमंद होता है। सरसों के तेल में नमक मिलाकर मसूड़ों पर हल्की मालिश करने से दांत दर्द, मसूड़ों पर सूजन और दांतों से खून निकलने वाली समस्याओं को कम किया जा सकता है। साथ ही दांतों को मजबूत बनाये रखने व दांतों के पीलेपन को भी दूर करने में भी सहायक है।
  6. रोग प्रतिरोधक क्षमता को बढ़ाने के लिए सरसों के तेल का सेवन लाभदायक होता है, क्योंकि सरसों का तेल शरीर की अंदरुनी कमजोरी को दूर करने में सहायक होता है। सरसों के तेल से बने भोजन का सेवन करने से यह शरीर की प्रतिरोधक क्षमता को बढ़ने में सहायक होता है साथ ही सरसों के तेल से मालिश करना भी फायदेमंद होता है।
  7. अक्सर कान के दर्द को ठीक करने के लिए सरसों के तेल का उपयोग किया जाता है और यह उपयोग फायदेमंद साबित हुआ है। ऐसे में जिन लोगों को कान दर्द की समस्या है या कभी कभी कान दर्द होने लगता है, उन लोगों के लिए सरसों के तेल का उपयोग फायदेमंद हो सकता है।
  8. वजन को कम करने के लिए सरसों का तेल फायदेमंद होता है, क्योंकि सरसों का तेल शरीर का मोटाबॉलिज्म रेट बढ़ा देता है, जो वजन को कम करने में सहायक होता है।
  9. सर्दियों में फटे होठों को ठीक करने के लिए लिप बाम का इस्तेमाल करने के बजाये सरसों के तेल का इस्तेमाल करना फायदेमंद होता है। सरसों का तेल फटे होठों को जल्द ही ठीक करता है और उनको मुलायम बनाये रखने में भी सहायक होता है।
  10. कैंसर से बचाव में भी सरसों के तेल का सेवन फायदेमंद होता है। एक शोध के अनुसार सरसों के तेल का उपयोग करने से कैंसर का खतरा कम होता है। सरसों के तेल में एंटी- कैंसर गुण पाए जाते है, जो शरीर में कैंसर कोशिकाओं की खपत को कम करने में सहायक होते है।
  11. फंगल संक्रमण से बचाव के लिए सरसों के तेल का सेवन फायदेमंद होता है। सरसों के तेल में पाए जाने वाला एलिल आइसोथियोसाइनेट नामक तत्व, यह तत्व एंटी फंगल होने के कारण कवक के विकास को रोकता है। सरसों का तेल त्वचा पर चकत्ते और अन्य त्वचा संक्रमण के बचाव में भी सहायक होता है ।
  12. बालों के लिए सरसों का तेल फायदेमंद होता है क्योंकि सरसों के तेल में विटामिन ई की भरपूर मात्रा पायी जाती है, जो बालों के लिए लाभकारी होती है। विटामिन ई बालों को लम्बा और मजबूत बनाने रखने में सहायक होता है। सरसों के तेल में नींबू का रस मिलाकर बालों में मालिश करने से यह बालों को लम्बा, घना और मजबूत बनाये रखने के साथ रुसी को भी ख़त्म करने में भी सहायक होता है।
सरसों तेल के नुकसान क्या है? (Losses Of Mustard Oil In Hindi)
  1. सरसों के तेल में मौजूद इरुसिक एसिड का स्तर अधिक होने के कारण, यह दिल के स्वास्थ्य के लिए नुकसानदायक होता है। यह हृदय की मांसपेशियों को नुकसान पहुंचाने के साथ दिल के लिए भी हानिकारक होता है ।
  2. गर्भावस्था के समय गर्भवती महिलाओं को सरसों के तेल के अत्यधिक सेवन से बचना चाहिए क्योंकि सरसों के तेल में कुछ ऐसे तत्व पाए जाते हैं, जो शिशु के लिए हानिकारक हो सकते हैं। जिससे गर्भपात होने का खतरा बना रहता है।
  3. कुछ लोगों को सरसों के तेल से खुजली, लालिमा और सूखी त्वचा जैसी एलर्जी भी हो सकती है, ऐसे में उन लोगों को सरसों के तेल का सेवन तुरंत बंद कर देना चाहिए।
  4. सरसों के तेल का अत्यधिक मात्रा में सेवन करने से शरीर में राइनाइटिस हो सकता है। जिससे खांसना, छींकना, भरी हुई नाक व नाक से पानी बहना आदि समस्याओं का सामना करना पढ़ सकता है। अगर किसी व्यक्ति को सरसों के तेल के सेवन से यह सब परेशानियां हो रही है तो, उस व्यक्ति ने सरसों के तेल का सेवन तुरंत बंद कर देना चाहिए।
  5. अगर कोई व्यक्ति लम्बे समय से अपनी त्वचा पर सरसों के तेल का उपयोग करता है, तो उसकी त्वचा काली होने लगेगी। इसलिए त्वचा पर सरसों के तेल का लगातार इस्तेमाल नहीं करना चाहिए।
  6.  एसिड से भरपूर सरसों के तेल का अत्यधिक मात्रा में सेवन करने से यह ब्लड प्लेटलेट्स में बड़ी तेज़ी से गिरावट का कारण बनता है, जिससे शरीर में एनीमिया का ख़तरा बढ़ जाता है।

अक्सर पूछे जाने वाले सवाल। (Frequently Asked Questions)

Q. कच्ची घानी सरसों का तेल क्या है?

यह कोल्ड प्रेस्ड सरसों का तेल होता है, जिसे कच्चे ग्रेड 1 सरसों के तेल के रूप में भी जाना जाता है। यह सरसों के तेल का एक प्रकार है, जिसकी जानकारी हम ऊपर प्रकार वाले भाग में दे चुके हैं।

Q. क्या हम गीले बालों पर सरसों का तेल लगा सकते हैं?

जी नहीं, सरसों के तेल को गीले बालों में नहीं लगाना चाहिए। नहाने के बाद बालों को हल्का सूखने दें या तौलिए से पोंछकर इसे इस्तेमाल करें, ताकि बालों में सरसो का तेल लगाने के फायदे बेहतर तरीके से हासिल हो सकें।

Q. क्या नियमित रूप से सरसों का तेल लगाने से त्वचा काली पड़ जाती है?

जी नहीं, सरसों तेल के नियमित इस्तेमाल से त्वचा का रंग काला नहीं होता है, बल्कि इससे त्वचा चमकदार बन सकती है। फिलहाल, इस बात की पुष्टि करने के लिए किसी तरह का वैज्ञानिक प्रमाण मौजूद नहीं है।

Q. मुझे अपने बालों पर सरसों का तेल कितने समय तक लगाए रखना चाहिए?

सरसों के तेल को आप लगाकर पूरी रात के लिए छोड़ सकते हैं।

Q. क्या सरसों के तेल की तुलना में रिफाइंड तेल बेहतर है?

नहीं, रिफाइंड ऑयल की तुलना में सरसों का तेल ज्यादा अच्छा होता है। यह प्राकृतिक और स्वास्थ्यवर्धक होता है।

Q. सरसों के तेल से फैट हटाने के तरीके क्या हैं?

एक पुरानी विधि की मदद से सरसों के तेल से फैट को कम किया जा सकता है। इसके लिए सरसों के बीजों को पीसकर उसे पानी के साथ मिला सकते हैं और इस मिश्रण द्वारा तेल प्राप्त कर सकते हैं। इस विधि द्वारा प्राप्त किए गए तेल में आमतौर पर अन्य तेलों की तुलना में कम फैट होता है।

Q. अगर सरसों के तेल से एलर्जी है, तो कैसे पता चलेगा?

हमने इस लेख के नुकसान वाले भाग में बताया है कि सरसों के तेल से एलर्जिक रिएक्शन हो सकता है। इसका असर त्वचा पर दिखाई दे सकता है। अगर किसी को इसके इस्तेमाल से एलर्जी होती है, तो इस तेल का इस्तेमाल करना बंद कर दें और तुरंत डॉक्टर से संपर्क करें।

Q. क्या सरसों का तेल (टॉक्सिक) विषाक्त होता है?

वैसे तो सरसों के तेल में प्रत्यक्ष रूप से टॉक्सिक नहीं होता, लेकिन इसमें इरुसिक एसिड की अच्छी मात्रा पाई जाती है, जिसे अधिक मात्रा में लेने पर यह टॉक्सिक हो सकता है।

Q. अन्य भाषाओं में सरसों का तेल क्या कहा जाता है?

सरसों के तेल को अंग्रेजी में मस्टर्ड ऑयल, तेलुगु में अवन्यून, मलायम में कदुगेना और मराठी में मोहरीच कहा जाता है। इसकी जानकारी लेख में ऊपर विस्तार से दी गई है।

Q. सरसों तेल की तासीर कैसी होती है?

सरसों तेल की तासीर गर्म होती है, इसलिए इसे कम मात्रा में ही उपयोग करना चाहिए।

Q. सरसों के तेल में कपूर मिलाकर लगाने के फायदे?

अगर आप सोच रहे हैं कि सरसों के तेल में क्या मिलाकर लगाएं, तो हम आपको बता दें कि इसमें कपूर को मिलकर लगाने से घुटनों और जोड़ों के दर्द से राहत मिल सकती है। साथ ही त्वचा में निखार भी आ सकता है।

Q. सरसों के तेल की मालिश करने से क्या फायदा होते हैं?

जैसा कि हमने ऊपर बताया है कि सरसों के तेल की मालिश के फायदे बढ़ते उम्र के प्रभाव को धीमा कर सकते हैं। इसलिए, ऐसा माना जा सकता है कि इसकी मालिश से त्वचा को टाइट किया जा सकता है।

Q. सरसों का कच्चा तेल पीने से क्या फायदा हो सकता है?

सरसों का तेल पीने के फायदे कई हो सकते हैं, जिनमें ऊपर बताए गए लाभ शामिल हैं, लेकिन इसे हमेशा खाद्य पदार्थ के साथ ही इस्तेमाल में लाना चाहिए।

Q. सरसों के तेल और लहसुन मिलाकर खाने से क्या फायदा हो सकता है?

सब्जी तैयार करते समय सरसों के तेल में तले हुए लहसुन का सेवन किया जा सकता है। वहीं, सरसों के तेल में लहसुन का तड़का लगाकर नाक में उपयोग किया जाता है, जिससे खर्राटे की समस्या कम हो सकती है। फिलहाल, इस तथ्य के संबंध में कोई वैज्ञानिक प्रमाण उपलब्ध नहीं है।

मुझे उम्मीद है की आप को ये आर्टिकल जो की (hindigyanshala.com) सरसों के तेल से होने वाले फ़ायदे और नुकसान क्या है पर था। जो की पसंद आया होगा। ऐसे ही नॉलेज पाने के लिए हमारे से जुड़े रहे और फेस्बूक पेज को लाइक करे। पोस्ट को शेयर करे।