अयोध्या नगरी से जुड़े 10 रोचक तथ्‍य (Ram Temple In Ayodhya :)

ayodhya ram mandir pic hd

राम एक ऐतिहासिक महापुरुष थे और इसके पर्याप्त प्रमाण हैं। शोधानुसार पता चलता है कि भगवान राम का जन्म आज से 7128 वर्ष पूर्व अर्थात 5114 ईस्वी पूर्व को उत्तरप्रदेश के अयोध्या नगर में हुआ था। आओ जानते हैं अयोध्या और राम मंदिर के बारे में 10 रोचक तथ्‍य।

1.  कहते हैं कि म‍ंदिर इतना भव्य होगा कि यह कई किलोमीटर दूर से भी स्पष्ट नजर आएगा। भव्य राम मंदिर के करीब 3 दशक पुराने विश्व हिन्दू परिषद के नक्शे में बदलाव कर इसकी ऊंचाई बढ़ाते हुए एक और मंजिल जोड़ी जा सकती है। एक मंडप और एक अतिरिक्त मंजिल के साथ 35 फुट ऊंचे शिखर का विस्तार करने पर मंथन हो रहा है। इसके अलावा अब राम मंदिर में तीन के बजाय पांच गुंबद होंगे।
2.   अब यह मंदिर 3 मंजिला होगा। रामलला की मूर्ति निचले तल पर विराजमान होगी। विश्व हिंदू परिषद के वर्तमान राम मंदिर मॉडल की ऊंचाई 141 फुट से बढ़ाकर 161 फुट की जाएगी। मंदिर में जाने के लिए 5 दरवाजे (सिंह द्वार, नृत्य मंडप, रंग मंडप, पूजा-कक्ष और गर्भगृह) होंगे। इस मंदिर की लंबाई लगभग 270 मीटर, चौड़ाई 140 मीटर होगी। हर मंजिल पर लगभग 106 खम्भे होंगे। पहली मंजिल पर खम्भे की लम्बाई लगभग 16.5 फुट और दूसरी मंजिल पर 14.5 फुट प्रस्तावित है। प्रत्येक मंजिल 185 बीम पर टिकी होगी।
3.   मंदिर में लोहे का इस्तेमाल नहीं किया जाएगा। मंदिर में संगमरमर का फ्रेम और लकड़ी के दरवाजे होंगे। इसमें पूरे मंदिर के निर्माण में करीब 1.75 लाख घन फुट पत्थर की जरूरत बताई गई थी। मंदिर के फर्श में संगमरमर लगाया जाएगा। यह मंदिर लगभग 221 पिलर पर खड़ा होगा। इसमें आवागमन के लिए मुख्य पांच द्वारों के अलाव कुल 24 द्वार बनाए जाएंगे। मंदिर के प्रत्येक खंभे पर 12 मूर्तियां उकेरी गई हैं। यह मूर्तियां देवी-देविताओं की हैं।
4.   यह नागर शैली में बना अष्टकोणीय मंदिर होगा। इसमें भगवान राम की मूर्ति और राम दरबार होगा। मुख्य मंदिर के आगे-पीछे सीता, लक्ष्मण, भरत और भगवान गणेश के मंदिर होंगे। यह अक्षरधाम मंदिर की शैली में बनेगा। मंदिर परिसर में संत निवास, शोध केंद्र, कर्मचारियों के आवास, भोजनालय इत्‍यादि होंगे।
5.  दो हजार साल पहले अयोध्या की राजकुमारी सुरीरत्ना नी हु ह्वांग ओक अयुता (अयोध्या) बनी थी दक्षिण कोरिया के ग्योंगसांग प्रांत के किमहये शहर की महारानी। चीनी भाषा में दर्ज दस्तावेज सामगुक युसा में कहा गया है कि ईश्वर ने अयोध्या की राजकुमारी के पिता को स्वप्न में आकर ये निर्देश दिया था कि वह अपनी बेटी को उनके भाई के साथ राजा सुरो से विवाह करने के लिए किमहये शहर भेजें। आज कोरिया में कारक गोत्र के तकरीबन साठ लाख लोग खुद को राजा सुरो और अयोध्या की राजकुमारी के वंश का बताते हैं। इस पर यकीन रखने वाले लोगों की संख्या दक्षिण कोरिया की आबादी के दसवें हिस्से से भी ज्यादा है।
6.  अयोध्या राम ही नहीं बल्कि उनके तीनों भाइयों और जैन धर्म के प्रथम तीर्थंकर ऋषभनाथ का भी जन्म हुआ था जो कि श्रीराम के कुल के ही थे। अयोध्या में ऋषभनाथ के अलावा अजितनाथ, अभिनंदननाथ, सुमतिनाथ और अनंतनाथ का भी जन्म हुआ था इसलिए यह जैन धर्म के लिए बहुत ही पवित्र भूमि है। ऋषभनाथ के पुत्र भरत ने कई काल तक यहां राज किया। श्रीमद्भागवत के पञ्चम स्कंध एवं जैन ग्रंथों में चक्रवर्ती सम्राट राजा भरत के जीवन एवं उनके अन्य जन्मों का वर्णन आता है। महाभारत के अनुसार भरत का साम्राज्य संपूर्ण भारतीय उपमहाद्वीप में व्याप्त था। अयोध्या इनकी राजधानी थी। इनके ही कुल में राजा हरिशचंद्र हुए और आगे चलकर उपर बताए गए महान राजा हुए।
7.  अयोध्या के आसपास एक नहीं लगभग 20 बौद्ध विहार होने का उल्लेख मिलता है। ऐसा कहते हैं कि भगवान बुद्ध की प्रमुख उपासिका विशाखा ने बुद्ध के सानिध्य में अयोध्या में धम्म की दीक्षा ली थी। इसी के स्मृतिस्वरूप में विशाखा ने अयोध्या में मणि पर्वत के समीप बौद्ध विहार की स्थापना करवाई थी। यह भी कहते हैं कि बुद्ध के माहापरिनिर्वाण के बाद इसी विहार में बुद्ध के दांत रखे गए थे।
8.  अयोध्या सिख धर्म का भी पवित्र स्थल है। यहां के ब्रह्मकुण्ड नामक स्थान पर गुरुनानकदेवजी ने तप किया था।
9.  श्रीराम के काल में अयोध्या की विश्व के प्रमुख व्यापारिक केंद्र में गिनती होती थी। वाल्मीकि रामायण के अनुसार यहां विभिन्न देशों के कारबारी आया जाया करते थे। यहां महत्वपूर्ण प्रकार के शिल्प और अस्त्र शस्त्र बनते थे। यह हाथी घोड़े के कारोबार का भी केंद्र था। कम्बोज और बाहित जनपद के सबसे बेहतर नस्ल के घोड़े का यहां कारोबार होता था। यहां विंध्याचल और हिमाचल के गजराज भी होते थे। यह भी कहा जाता है कि यहां हाथियों की हाइब्रिड नस्ल का कारोबार भी होता था।
10.  अयोध्या था देश का सबसे संपन्न और वैभवशाली नगर। वाल्मीकि रामायण के अनुसार वह पुरी चारों ओर फैली हुई बड़ी-बड़ी सड़कों से सुशोभित थी। सड़कों पर नित्‍य जल छिड़का जाता था और फूल बिछाए जाते थे। अर्थात इन्द्र की अमरावती की तरह महाराज दशरथ ने उस पुरी को सजाया था। इस पुरी में बड़े-बड़े तोरण द्वार, सुंदर बाजार और नगरी की रक्षा के लिए चतुर शिल्‍पियों द्वारा बनाए हुए सब प्रकार के यंत्र और शस्‍त्र रखे हुए थे। वहां के निवासी अतुल धन संपन्‍न थे, उसमें बड़ी-बड़ी ऊंची अटारियों वाले मकान जो ध्‍वजा-पताकाओं से शोभित थे और परकोटे की दीवालों पर सैकड़ों तोपें चढ़ी हुई थीं। ‘स्‍त्रियों की नाट्य समितियों की भी यहां कमी नहीं है और सर्वत्र जगह-जगह उद्यान निर्मित थे। आम के बाग नगरी की शोभा बढ़ाते थे। नगर के चारों ओर साखुओं के लंबे-लंबे वृक्ष लगे हुए थे। यह नगरी दुर्गम किले और खाई से युक्‍त थी तथा उसे किसी प्रकार भी शत्रुजन अपने हाथ नहीं लगा सकते थे।
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