पथरी में लाजवंती का प्रयोग।(Lajwanti use in stone)

लाजवंती (छुई मुई) पौधे के फायदे व नुकसान

छुई मुई का पौधा या लाजवन्ती क्या है? (What is Lajwanti?)

लाजवन्ती के खास बात यह है कि लाजवन्ती को हाथ लगाते ही यह सिकुड़ जाती है और हाथ हटाने पर फिर अपनी पूर्व अवस्था में आ जाती है, यही इस बूटी की खास पहचान है। इसलिए इसे छुई-मुई भी कहते है, इस प्रजाति के पौधे अनेक रुपों में मिलते हैं। इसके फूल गुलाबी रंग के तथा छोटे होते हैं। इसकी जड़ स्वाद में अम्लिय तथा कठोर होती है। चरक संहिता के संधानीय एवं पुरीषसंग्रहणीय महाकषाय में तथा सुश्रुत संहिता के प्रियंग्वादि व अम्बष्ठादि गणों में इसकी गणना की गई है।

लाजवंती प्रकृति से ठंडे तासीर की और कड़वी होती है। आयुर्वेदिक ग्रंथों में लाजवंती के कई फायदे (lajwanti ke fayde) बताए  गए हैं जिनमें कफ पित्त को दूर करना, पित्त (नाक-कान से खून बहना), दस्त, पित्त, सूजन, जलन, अल्सर, कुष्ठ तथा योनि रोगों से आराम दिलाना आदि शामिल हैं।

लाजवंती के पत्ते ग्रन्थि (Grandular swelling), भगन्दर (fistula), गले का दर्द, क्षत (छोटे-मोटे कटने या छिलने पर), अल्सर, अर्श या पाइल्स तथा रक्तस्राव (ब्लीडिंग) में लाभप्रद होते हैं। इसका पञ्चाङ्ग मूत्राशय की पथरी, सूजन, आमवात या गठिया तथा पेशी के दर्द में लाभप्रद होता है।

इसकी जड़ श्वास  संबंधी कष्ट, अतिसार या दस्त, अश्मरी या पथरी तथा मूत्राशय सम्बन्धी रोगों में लाभप्रद होती है। यह विष का असर कम करने, मूत्रल या ज्यादा मूत्र होना, विबन्धकारक या कब्ज नाशक, पूयरोधी या एंटीसेप्टिक, रक्तशोधक या खून को साफ करने वाली, कामोत्तेजक, बलकारक, घाव को जल्दी ठीक करने में सहायक होने के साथ-साथ सूजन, विष, प्रमेह या डायबिटीज के उपचार में सहायता करती है।

पथरी में लाजवंती का प्रयोग | (Use of Lajwanti in Stones Problem )

पानी की कमी तथा भोजन में आक्सलेट, कैल्शियम, फास्फेट और प्यूरीन का अधिक सेवन पथरी का कारण बन जाता है, जिससे पेट में, गुर्दे में तथा कमर में बड़ा तेज दर्द होता है।

इस अवस्था में लाजवन्ती जिसे छुईमुई भी कहते हैं इसका प्रयोग लाभदायक सिद्ध होता है। लाजवन्ती की जड़ या पंचांग का काढ़ा बनायें और सेवन करें।

प्रातः खाली पेट लेने से अच्छा है। इसके सेवन करने से मूत्रावरोध दूर होकर पथरी निकल जाती है तथा मूत्र-नलिका पर आयी हुई सूजन मिट जाती है।

लाजवन्ती सामान्यतः जंगली क्षेत्रों में, ग्रामीण इलाकों में मिल जाता है। जड़ी-बूटी के दुकानों से भी प्राप्त किया जा सकता है। बस कुछ दिन (सप्ताह) तक इसका नियमित सेवन करें । यह पथरी निकालकर मूत्र-मार्ग की समस्याओं को भी ठीक कर देता है।

बवासीर में रामबान इलाज हैं, लाजवंती का पौधा (Lajwanti Benefits in Piles)

अगर ज्यादा मसालेदार, तीखा खाने के शौकीन हैं तो बवासीर (पाइल्स) होने की संभावना काफी बढ़ जाती है। बवासीर की समस्या होने पर अक्सर शौच के दौरान रक्तस्राव होने लगता है, इस समस्या को खूनी बवासीर कहा जाता है. इस समस्या में लाजवंती का उपयोग आपके लिए फ़ायदेमंद हो सकता है. आयुर्वेद के अनुसार लाजवंती में कषाय रस होता है जो खूनी बवासीर में होने वाले रक्तस्राव को नियंत्रित करके बवासीर के लक्षणों को कम करता है. आइये जानते हैं कैसे इसका उपयोग करें :

-एक चम्मच लाजवंती पत्ते के चूर्ण को दूध के साथ सुबह शाम अथवा तीन बार देने से बवासीर में लाभ होता है।

-लाजवंती के जड़ तथा पत्ते के एक चम्मच चूर्ण (Lajwanti powder) को दूध में मिलाकर सुबह शाम देने से बवासीर और भगंदर या  में लाभ होता है।

किडनी के लिए उपयोगी लाजवंती का पौधा। (Lajwanti plant useful for kidney)

आपने हाथ लगाने पर सिकुड़ने वाले पौधे ‘छुई-मुई’ का नाम जरूर सुना होगा। इसे पौधे का वास्तविक नाम लाजवंती है। यह पौधा देखने में जितना साधारण है, उतना ही गुणकारी भी होता है। आपको यह पौधा कहीं भी देखने को मिल सकता है। लेकिन आपको जरा भी अंदाजा नहीं होगा कि यह आपके कितने काम आ सकता है। इस पौधे के सभी हिस्सों जड़, तना, फूल, फल, पत्ते, फल का जूस, फल का चूर्ण, जड़ का चूर्ण, पत्तों का रस, फल के बीजों का घरेलू दवाओं में प्रयोग किया जाता है।

किसी इंसान या बाहरी चीज के छू जाने से सिकुड़ने वाला यह पौधा कई गंभीर बीमारियों का काल है। इस पौधे का पौष्टिक गुणों के आधार पर आयुर्वेद में औषधि के रूप में इस्तेमाल किया जाता है। इसकी पत्तियों और जड़ों में एंटीवायरल और एंटीफंगल गुण होते हैं जिस कारण यह कई रोगों से लड़ने में सक्षम है।

FAQ:-

1. छुईमुई का वैज्ञानिक नाम क्या है?

Mimosa pudica (छुईमुई अथवा लाजवंती)

2. लाजवंती को अंग्रेज़ी में क्या कहते हैं?

– छुईमुई (Chuimui) = Touch Me Not

3. लाजवंती क्या काम आती है?

– लाजवंती का उपयोग गठिया के लिए आयुर्वेदिक दवा के रूप में किया जा सकता है। लाजवंती के शांत और पीड़ा को कम करने वाले गुणों के कारण, इसका उपयोग गठिया की वृद्धि और बढ़ने में मदद करता है।

4. लाजवंती का पौधा कौन सा है?

– छुई-मुई या लाजवंती एक प्रकार का पौधा है, जिसकी पत्तियां, मानव स्पर्श पाने पर सिकुड जातीं हैं, व कुछ देर बाद अपने आप ही खुल जातीं हैं। आयुर्वेद की द्रष्टि से यह पौधा बहुत हे उपयोगी होता है। इसका प्रयोग बवासीर और भगंदर जैसी विभिन्न प्रकार की बीमारियों को दूर करने में किया जाता है।

5. लाजवंती का पौधा घर में लगाने से क्या होता है?

– लाजवंती का पौधा हमें घर के ईशान कोण में लगाना चाहिए। लाजवंती के पौधे को गमले में लगाकर ईशान कोण में रख सकते हैं। इस पौधे को प्रतिदिन जल दें इससे आपके घर के धन-धान्य में वृद्धि होगी, और आपकी कुंडली में राहु का दोष दूर होगा।

6. लाजवंती का पौधा मुरझा क्यों जाता है?

– लाजवंती या छुई-मुई के पौधे की पत्तियां स्पर्श के प्रति संवेदनशील होती हैं। जब हम इनकी पत्ती को छूते हैं तो पतली दीवारों वाली कोशिकाओं से तने में चला जाता है, फलस्वरूप ये कोशिकायों सिकुड़ जाती हैं और पत्तियों का तनाव समाप्त हो जाता है, जिससे उनमें ऐंठन पैदा हो जाती है। इसी को हम लाजवंती या छुई-मुई भी का मुरझाना कहते हैं।

7. लाजवंती के पेड़ कैसे होते हैं?

– लाजवंती या छुई-मुई का वैज्ञानिक नाम:Mimosa pudica हैं, यह एक प्रकार का पौधा है, जिसकी पत्तियां, मानव स्पर्श पाने पर या तेज फूंक मारने पर सिकुड जातीं हैं, और कुछ देर बाद अपने आप ही पहले जेसे ही हो जातीं हैं।

8. लाजवंती का पौधा घर में लगाने से क्या होता है?

– ऐसा माना जाता है कि घर में लाजवंती या छुई-मुई का पौधा लगाने से परिवार में सकारात्मक सोच बनी रहती है और घर का माहौल भी अच्छा रहता है, इससे घर में ऐसा माहौल कभी नहीं बनता है जिसमें परिवार के सदस्य आपस में झगड़ते हों। लाजवंती घर में लगाने से पीढ़ियां फलती-फूलती हैं और परिवार तरक्की भी करता हैं।

9. लाजवंती का पौधा क्या काम आता है?

– छुईमुई की जड़ और पत्तियों का पाउडर बनाकर दूध में मिलाकर दो बार देने से बवासीर और भगंदर जैसे रोग में आराम मिलता है। गुजरात राज्य के डाँग में आदिवासी पत्तियों के रस को बवासीर के घाव पर सीधे लेपित करने की बात करते हैं। इनके अनुसार यह रस घाव को सुखाने का कार्य करता है और अक्सर होने वाले खून के बहाव को रोकने में भी मदद करता है।

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