ऑक्सीजन कैसे बनती है। (how is oxygen made)

ऑक्सीजन कैसे बनती है।

कोरोना महामारी के बीच मेडिकल ऑक्सीजन की किल्लत की खबर है। कई राज्यों ने मेडिकल ऑक्सीजन की कमी की शिकायत की है। कोरोना महामारी ने लोगों को यह बात याद दिला दी कि हवा में मात्र 20 परसेंट की मौजूदगी रखने वाली गैस ऑक्सीजन जिंदगी के लिए कितना जरूरी है। देश में जैसे-जैसे कोविड के मरीज बढ़ रहे हैं, वैसे-वैसे ऑक्सीजन की मांग बढ़ रही है। इस मांग की पूर्ति के लिए प्रोडक्शन बढ़ा दिया गया है और जिन राज्यों में ऑक्सीजन प्लांट है, वहां से देश के दूर-दराज इलाकों में सप्लाई भेजी जा रही है।

पूरी दुनिया की बात करें तो पश्चिमी यूरोप, रूस, अमेरिका, पूर्वी यूरोप और जापान में ऑक्सीजन का सबसे ज्यादा प्रोडक्शन होता है। इन देशों से दुनिया के अलग-अलग देशों में सप्लाई की जाती है। भारत की बात करें तो आंध्र प्रदेश, झारखंड, ओडिशा और हरियाणा में ऑक्सीजन का बड़े स्तर पर उत्पादन होता है। इन्हीं राज्यों से मेडिकल ऑक्सीजन सप्लाई की जाती है। ऑक्सीजन की सप्लाई हॉस्पिटल के अलावा उद्योगों को भी की जाती है जहां केमिकल रिएक्शन में इसका उपयोग होता है। देश हो या विदेश, लगभग सब जगह ऑक्सीजन बनाने की एक जैसी विधि होती है।

कुदरती तरीका (natural method)

ऑक्सीजन बनाने की जहां तक बात है। तो अब तक हम सबसे सामान्य विधि प्रकाश संश्लेषण या फोटोसिंथेसिस के बारे में पढ़ते और जानते आए हैं जो कि कुदरती तरीका है। इस विधि से पेड़-पौधे ऑक्सीजन बनाते हैं। पौधे हवा से कार्बन डाईऑक्साइड सोख कर उसे ऑक्सीजन में तब्दील करते हैं। प्राणी फिर उसी ऑक्सीजन को लेते हैं और कार्बन डाईऑक्साइड पर्यावरण में छोड़ देते हैं। इसका पूरा एक साइकिल चलता है।

ये दो विधियां सबसे उपयोगी (These two methods are most useful)

व्यावसायिक तौर पर जिस विधि से ऑक्सीजन गैस बनाई जाती है उसे क्रायोजेनिक डिस्टिलेशन प्रोसेस (cryogenic distillation process) या वैक्यूम स्विंग एडजोरप्शन प्रोसेस (vacuum swing adsorption process) कहते हैं।इन दोनों विधि में हवा से ऑक्सीजन को अलग कर लिया जाता है. हवा में 20 परसेंट ऑक्सीजन और 70 परसेंट नाइट्रोजन होता है। 10 परसेंट में बाकी गैस होती है। इन दोनों विधियों में ऑक्सीजन उत्पादन के साथ नाइट्रोजन और आर्गन गैस को अलग कर लिया जाता है। इन दोनों गैसों की भी उद्योगों में भारी मांग है।

केमिकल रिएक्शन (chemical reaction)

ऊपर बताई गई विधियों के अलावा केमिकल रिएक्शन से भी ऑक्सीजन का उत्पादन किया जाता है। इसके तहत कमेकिल कंपाउंड से ऑक्सीजन को अलग किया जाता है। और उसे गैस के रूप में तब्दील कर लिया जाता है। हालांकि यह विधि बहुत महंगी है और इससे निकली गैस का इस्तेमाल भी बड़े-बड़े कार्यों में किया जाता है, जैसे पनडुब्बियों, एयरक्राफ्ट या स्पेसक्राफ्ट में लाइफ सपोर्ट ऑक्सीजन के तौर पर सामान्यतः इस ऑक्सीजन का इस्तेमाल अस्पतालों आदि में नहीं होता।

इलेक्ट्रोलिसिस विधि से उत्पादन (production by electrolysis method)

एक विधि ये भी है कि पानी में इलेक्ट्रिक करंट पास किया जाता है। और पानी यानी कि H2O को हाइड्रोजन और ऑक्सीजन में तोड़ दिया जाता है। ये दोनों गैस ऊपर उठती हैं जिन्हें मशीनों के जरिये सोख लिया जाता है। इस मशीन में दो इलेक्ट्रोड लगे रहते हैं। हाईड्रोजन निगेटिव टर्मिनल पर और ऑक्सीन पॉजिटिव टर्मिनल पर जमा होती है।

इस विधि को इलेक्ट्रोलिसिस कहते हैं। जिसमें बेहद शुद्ध दोनों गैसों का उत्पादन होता है। बड़े स्तर पर ऑक्सीजन का उत्पादन क्रायोजेनिक डिस्टिलेशन प्रोसेस से होता है जिसकी शुरुआत 1895 में हुई थी। इस प्रोसेस में जो ऑक्सीजन गैस निकलती है वह 99 परसेंट तक शुद्ध होती है। एडजोरप्शन प्रोसेस से निकलने वाली ऑक्सीजन की शुद्धता 90-93 परसेंट तक होती है।

क्रायोजेनिक डिस्टिलेशन प्रोसेस (cryogenic distillation process)

इस विधि में बेहद ठंडे तापमान पर हवा में से वाटर वेपर, कार्बन डाईऑक्साइड, हेवी हाइड्रोकार्बन को अलग किया जाता है। इसके बाद इस हवा को क्रायोजेनिक पाइप से गुजारा जाता है। अगले चरण में इस हवा को तीन हिस्से नाइट्रोजन, ऑक्सीजन और आर्गन में अलग कर लिया जाता है। इस विधि को फ्रैक्शनल डिस्टिलेशन कहते हैं। इसमें अलग-अलग चरण में हवा को गुजारा जाता है।  ताकि ज्यादा से ज्यादा शुद्ध ऑक्सीजन मिल सके। अंत में काफी कम दबाव पर ऑक्सीजन को निकाल लिया जाता है। जिसकी शुद्धता 99.5 परसेंट तक होती है। आजकल और भी नई तकनीक आ गई है जो इसी ऑक्सीजन को शुद्ध कर और आर्गन की मात्रा निकाल कर ऑक्सीजन को 99.8 परसेंट तक शुद्ध बनाती है। Oxygen Cylinder 1 e1626590412286

अस्पतालों में ये कंपनिया कर रही है ऑक्सीजन सप्लाई:

  • टाटा स्टील, जो कि रोजाना तमाम अस्पतालों और राज्य सरकारो को 200-300 टन लिक्विड मेडिकल भेज रही है।
  • जिंदल स्टील जहां एक तरफ ओडिशा और छत्तीसगढ़ को 50-100 मीट्रिक टन ऑक्सीजन अस्पतालों को दे रहा है, तो वहीं दूसरी तरफ महाराष्ट्र में वो राज्य सरकार को रोजाना लगभग 185 टन ऑक्सीजन दे रही है।
  • वहीं, रिलायंस महारास्ट्र सरकार और गुजरात सरकार को ऑक्सीजन दे रही है।
  • आर्सेलर मित्तल निप्पों रोजाना अस्पतालों और राज्य सरकारों को 200 मीट्रिक टन तक ऑक्सीजन की सप्लाई कर रहा है।
  • वहीं, सेल ने अपने बरनपुर, बोकारो, भिलाई, दुर्गापुर और राउरकेला जैसी स्टील प्लांट्स से लगभग 33 हजार टन तक लिक्विड ऑक्सीजन की सप्लाई की है।

ऑक्सीजन बनाने वाली कंपनियों के नाम

भारत में ऑक्सीजन बनाने वाली कई कंपनियां हैं। इन कंपनियों द्वारा तैयार की जाने वाली ऑक्सीजन का इस्तेमाल केवल अस्पतालों में मरीजों के लिए ही नहीं, बल्कि तमाम उद्योगों जैसे पेट्रोलियम, स्टील इत्यादि में भी किया जाता है। ऑक्सीजन बनाने वाली कंपनियों के नाम कुछ इस प्रकार हैं।

  • रीफेक्स इंडस्ट्रीज लिमिटेड
  • भगवती ऑक्सीजन लिमिटेड
  • ऐलनबरी इंडस्ट्रियल गैसेज़ लिमिटेड
  • नेशनल ऑक्सीजन लिमिटेड
  • लिंडे इंडिया लिमिटेड
  • आईनॉक्स एयर प्रोडक्ट्स लिमिटेड
  • गगन गैसेज़ लिमिटेड