हिमा दास भारत एथलेटिक्स इतिहास की स्वर्ण परी बनीं।

हिमा दास भारत एथलेटिक्स इतिहास की स्वर्ण परी बनीं।
हिमा दास जीवन परिचय (Hima Das Biography in Hindi)

हिमा दास का जन्म, परिवार और शिक्षा (Birth, Family And Education) –
हिमा दास का जन्म भारत के असम राज्य के ढिंग गांव में हुआ है और इनके माता पिता का नाम जोमाली और रोनजीत दास है.इनके पिता अपने राज्य में चावल की खेती किया करते हैं, जबकि इनकी मां घर को संभालती हैं. 18 वर्षीय हिमा के परिवार में इनके माता पिता के अलावा इनके पांच भाई और बहन हैं और ये अपने माता पिता की सबसे छोटी बेटी हैं.
हिमा दास ने कितनी पढ़ाई कर रखी है और किस स्कूल से पढ़ाई कर रखी है, इसके बारे में अभी तक कोई जानकारी उपलब्ध नहीं हैं.

हिमा दास की स्ट्रगल स्टोरी:

‘वह भले ही शुरुआत में पीछे चल रही थी, लेकिन मुझे तो पता चल गया था कि आज वह गोल्ड जीतने वाली है.”

गर्व, खुशी और उससे भी ज़्यादा जीत के विश्वास को समेटे ये शब्द हिमा दास के कोच निपुण दास के हैं, जो उनसे हज़ारों मील दूर गुवाहाटी में हिमा की जीत का जश्न मना रहे हैं.

किसी अंतरराष्ट्रीय एथलेटिक्स ट्रैक पर भारतीय एथलीट के हाथों में तिरंगा और चेहरे पर विजयी मुस्कान, ऊपर दिख रही इस तस्वीर का इंतज़ार लंबे वक़्त से हर हिंदुस्तानी कर रहा था.इंतज़ार की यह घड़ी गुरुवार देर रात उस समय खत्म हुई जब फ़िनलैंड के टैम्पेयर शहर में 18 साल की हिमा दास ने इतिहास रचते हुए आईएएएफ़ विश्व अंडर-20 एथलेटिक्स चैंपियनशिप की 400 मीटर दौड़ स्पर्धा में पहला स्थान प्राप्त किया.

हिमा विश्व एथलेटिक्स चैंपियनशिप की ट्रैक स्पर्धा में स्वर्ण पदक जीतने वाली पहली भारतीय बन गई हैं.असम की रहने वाली हिमा की इस अंतरराष्ट्रीय कामयाबी के बाद फ़िनलैंड से लेकर पूरे हिंदुस्तान तक चर्चा है.गुवाहाटी में मौजूद हिमा के कोच निपुण दास की आवाज़ में गर्व और खुशी के एहसास एक साथ महसूस किए जा सकते हैं.वे हंसते हुए कहते हैं कि मुझे यक़ीन था कि हिमा फ़िनलैंड में कुछ बड़ा करके आएगी, लेकिन वह गोल्ड जीत लेगी इसका अंदाज़ा रेस शुरू होने से पहले तक नहीं था.

हिमा ने 400 मीटर की दौड़ स्पर्धा में 51.46 सेकेंड का समय निकालकर स्वर्ण पदक जीता, उनके पीछे रोमानिया की एंड्रिया मिक्लोस 52.07 सेकेंड के साथ दूसरे और अमरीका की टेलर मैनसन 52.28 सेकेंड के साथ तीसरे स्थान पर रहीं.

हिमा दास का करियर (Career)
  • साल 2017 में हिमा की मुलाकात अपने कोच, निपुण दास से खेल और युवा कल्याण निदेशालय की और से आयोजित किए गए इंटर-डिस्ट्रिक्ट कम्पटीशन के दौरान हुई थी.
  • इस प्रतिस्पर्धा में हिमा ने 100 मीटर और 200 मीटर की दौड़ में भाग लिया था और ये दौड़ हिमा ने सस्ते से जूते पहनकर लगाई थी. हिमा ने इन दोनों दौड़ में प्रथम स्थान हासिल किया था और जिस गति से उन्होंने ये दौड़ लगाई थी, उसको देखकर सब हैरान हो गये थे.
  • हिमा की दौड़ को देखकर निपुण दास ने उन्हें ट्रेन करनी की इच्छा जाहिर की थी और हिमा को वो अपने साथ गुवाहाटी ले आए थे. हिमा का परिवार काफी गरीब था इसलिए गुवाहाटी में हिमा को ट्रेनिंग देने के दौरान उनके रहने का सारा खर्चा उनके कोच द्वारा किया गया था.
  • शुरू शुरू में निपुण ने इन्हें 200 मीटर रेस के लिए तैयार किया था और जैसे जैसे इनका स्टैमिना बढ़ता गया, इन्होंने 200 मीटर की जगह 400 मीटर के ट्रेक पर दौड़ना शुरू कर दिया था.
हिमा दास ने 1 महीने में 5 गोल्ड मैडल जीत कर इतिहास रच दिया

हिमा दास ने नॉवे मेस्टो सीजेच रिपब्लिक (Nove Mesto, Czech Republic) में शनिवार को 400 मीटर की दौड़ में स्वर्ण-पदक हासिल करके देश का नाम रोशन किया हैं. इस दौड़ प्रतियोगिता में उन्होंने 52.09 सेकंड लिए थे हालाँकि ये स्पीड उनके अब तक के बेस्ट स्पीड से कम हैं. 2 जुलाई 2019 से लेकर 22 जुलाई 2019 तक हिमा यूरोप में होने वाली विविध प्रतियोगिताओं में 5 बार स्वर्ण पदक हासिल करके देश को गौरवान्वित कर चुकी हैं.

  • जुलाई में पहली बार हिमा ने 2 जुलाई को 200 मीटर की रेस 23.65 सेकंड में पूरी की थी और पोलैंड में पोजनान एथेलेटिक्स ग्रैंड प्रिक्स (Poznan Athletics Grand Prix) में स्वर्ण पदक हासिल किया था.
  • इसके बाद दूसरी बार 8 जुलाई को उन्होंने पोलैंड में ही कुट्नो एथेलेटिक्स मीट में 200 मीटर की रेस को 23.97 सेकंड में पूरा करके स्वर्ण पदक हासिल किया था,
  • फिर तीसरी बार 13 जुलाई को उन्होंने क्जेच रिपब्लिक में क्लाद्नो एथेलेटिक्स मीट (Kladno Athletics Meet in Czech Republic) में 23.43 सेकंड के साथ 200 मीटर की रेस में स्वर्ण पदक और
  • चौथी बार 17 जुलाई को टाबोर एथेलेटिक मीट (Tabor Atheletic Meet) में भी 200 मीटर में स्वर्ण पदक जीता था, इस तरह ये उनका इस महीने में पांचवा स्वर्ण पदक हैं.

अप्रैल में हुए एशियन एथेलेटिक्स चैंपियनशिप के बाद हिमा का ये बेहतरीन प्रदर्शन हैं, जिसमें हिमा 400 मीटर की रेस पूरी नहीं कर पायी थी,उसके बाद उन्होंने 400 मीटर की रेस में अब ही भाग लिया हैं.

हिमा को मिले पुरस्कार और सराहना

1. हेमा दास को 2018 में अर्जुन पुरस्कार से सम्मानित किया गया था।
2. हेमा को 2018 में यूनिसेफ-इंडिया के भारत के पहले युवा राजदूत के रूप में नियुक्त किया गया था।
3. हिमा एक अंतर्राष्ट्रीय इवेंट में स्वर्ण पदक जीतने वाली भोगेश्वर बरुआ के बाद असम की दूसरी एथलीट है।
4. असम सरकार द्वारा उन्हें असम का स्पोर्ट्स ब्रांड एंबेसडर नियुक्त किया गया है।

जैसा कि हम जानते हैं कि हिमा दास सिर्फ 19 साल की हैं। वह भारत की “नई उड़न” पारी के नाम से प्रसिद्द हो रही हैं। वह दुनिया को बता रही है कि P.T ऊषा के बाद कोई अन्य धावक भारत में पैदा हो सकता है। अगर हिमा का प्रदर्शन इसी तरह दिन ब दिन निखरता गया तो उनसे उम्मीद की जाती है कि वे टोक्यो ओलंपिक 2020 में ट्रैक और फील्ड स्पर्धाओं में भारत के लिए पदक जीतेंगीं।