आज हैं लताजी का जन्म दिन (Happy birthday Lata Mangeshkar ji)

Happy birthday lata mangeshkar

हैप्पी बर्थडे लता जी (Happy birthday Lata Mangeshkar ji)

स्वर कोकिला लता मंगेशकर अपना 91वां जन्मदिन मना रही हैं। मध्यप्रदेश के इंदौर में जन्मीं लता मंगेशकर के पिता का नाम दीनानाथ मंगेशकर था। लता को गायिकी अपने पिता से ही विरासत में मिली थी। एक समय लता की जिंदगी में ऐसा भी था जब उनकी पतली आवाज की वजह से उन्हें रिजेक्ट कर दिया गया था। लेकिन उन्होंने हार नहीं मानी और आगे बढ़ती गईं। लता मंगेशकर ने सालों तक फिल्म इंडस्ट्री को अपनी आवाज के जादू से लबरेज किया है। ऐसे में उनके कई मशहूर किस्से भी हैं। इस रिपोर्ट में आपको बताते हैं ‘आएगा आने वाला…’ गाने की रिकॉर्डिंग के दौरान का एक बेहद दिलचस्प किस्सा…

बॉलीवुड सहित देश की सभी फिल्म इंडस्ट्री में अपनी आवाज का जादू बिखेरने वाली स्वरकोकिला लता मंगेशकर का आज जन्मदिन है. वह 91 साल की हो गई हैं. उनका जन्म 28 सितंबर 1929 को मध्यप्रदेश के इंदौर में हुआ था. उन्होंने अपनी गायकी से देश के साथ-साथ दुनिया में भी लोगों का दिल जीता है. लता मंगेशकर को गायिकी क्षेत्र में अमूल्य योगदान देने के लिए भारत रत्न, पद्म विभुषण, पद्म भूषण और दादासाहेब फाल्के अवार्ड जैसे कई सम्मानों से नवाजा जा चुका है.लता मंगेशकर ने साल 1943 में महज 13 साल की उम्र में मराठी फिल्म ‘किती हसाल’ के लिए ‘नाचू या गाडे, खेलू सारी, मानी हौस भारी’ गीत के साथ लता मंगेशकर ने अपने करियर की शुरुआत की थी. इसके बाद वसंत जोगलेकर की फिल्म ‘आप की सेवा में’ के लिए ‘पा लागूं कर जोड़ि रे’ गीत के साथ उन्होंने हिंदी फिल्मों में अपनी पारी की शुरुआत की थी.

गार्डन में लताजी की आकर्षक प्रतिमा भी स्थापित कराई

इस शख्स ने घर से दो किलोमीटर दूर भाठागांव में दो एकड़ जमीन खरीदकर वहां गार्डन बनवाया और उसका नाम भी लता मंगेशकर गार्डन रख दिया। गार्डन में लताजी की आकर्षक प्रतिमा भी स्थापित करवाई है। वे लताजी को देवी की तरह मानते हैं और गार्डन में जाते हैं तो प्रतिमा को प्रणाम करते हैं। जन्म दिवस पर शुभकामना देने को जाते थे मुंबई पुरानी बस्ती निवासी रामदास अग्रवाल का नाम संगीत रसिक गर्व से लेते हैं। संगीत में रचि रखने वाला शायद ही कोई होगा, जो उन्हें न जानता हो।

वर्षों से, उनके संबंधों पर बहुत बहस और चर्चा हुई है। बहनें शायद ही इसके बारे में बोलती हैं लेकिन एक बार में आशा ने इसके बारे में खोल दिया है। जैसे जब उसने एक बार कहा कि गुलज़ार ने दोनों बहनों का वर्णन कैसे किया है। आशा ने बॉम्बे टाइम्स से कहा था, गुलज़ार जी ने एक बार इस बारे में लिखा था। उन्होंने कहा: “दो लोग पहली बार 1969 में चंद्रमा पर उतरे थे। जो पहले चाँद पर चढ़ा था (नील आर्मस्ट्रांग) वह प्रसिद्ध हो गया जबकि दूसरा (एडविन बज़ एल्ड्रिन) जिसने भी चाँद पर कदम रखा, के बारे में समान रूप से मनाया जाता है क्योंकि वह दूसरे स्थान पर आया था। आपकी बहन इस दुनिया में पहली बार आई थी, इसलिए वह वह है जो आप हैं। आप उसके बाद इस दुनिया में आए, इसलिए आपसे हमेशा उसकी तुलना की जाएगी।”

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