बाल शोषण क्या हैं? इसके कारण व उपाय क्या है।

what is baal apraad

बाल शोषण की समस्या विकराल रूप ले चुकी हैं। यह केवल देश नहीं बल्कि विदेशों में भी दिन प्रतिदिन बढ़ रहा है। कहते हैं कि समाज में व्याप्त हर बुराई के पीछे का कारण शिक्षा का अभाव होता है, लेकिन पुराने जमाने से अब तक शिक्षा का स्तर बढ़ा है, लेकिन उसके साथ ही इस बाल शोषण ने भी अपने पैर तेजी से फैलाए हैं। यह आधुनिक समाज की सबसे गंभीर बीमारी हैं, जिनके गिरफ्त में मासूमों की खुशियाँ, उनकी सुरक्षा हैं। बाल शोषण क्या हैं? यह कितने प्रकार का होता है और इसके अनुसार कैसे अपने बच्चों को को सफलतापूर्वक किया जा सकता है, साथ ही इसके खिलाफ क्या कानून हैं,

18 साल से कम उम्र के किसी भी बच्चे के साथ जानबूझकर मानसिक या शारीरिक तौर पर नुकसान पहुंचान या  दुर्व्यवहार करना आदि बाल शोषण माना जाता है। जो कानूनी तौर पर अपराध की श्रेणी में रखा गया है। बाल दुर्व्यवहार के कई रूप होते हैं।

    • शारीरिक शोषणः शारीरिक बाल शोषण की स्थिति तब होती है जब किसी बच्चे को शारीरिक तौर पर जानबूझकर नुकसान पहुंचाया जाता है।
    • भावनात्मक शोषणः भावनात्मक बाल दुर्व्यवहार का अर्थ है बच्चे के  आत्मसम्मान  या भावनात्मक स्थिति को नुकसान पहुंचाना। इसमें मौखिक और भावनात्मक हमले शामिल हो सकते हैं- जैसे बच्चे को जबरन शांत करना, उसे दूसरे बच्चों से एकदम अलग रखना, उसे अनदेखा करना या अस्वीकार करना।
    • चिकित्सक शोषणः जब कोई जानबूझकर किसी बच्चे को बीमार करता है, तो उसे चिकित्सा की आवश्यकता होती है। जिसकी वजह से बच्चे को अनावश्यक चिकित्सा देखभाल की जरूरत पड़ती है। यह मानसिक विकार के कारण हो सकता है, जैसे- माता-पिता किसी बच्चे को नुकसान पहुंचाते हैं।
    • बाल उपेक्षाः पर्याप्त भोजन, आश्रय, स्नेह, माहौल, शिक्षा या चिकित्सा देखभाल न मिलना।

कई मामलों में, बाल दुर्व्यवहार किसी ऐसे व्यक्ति द्वारा किया जाता है जिसे बच्चा जानता है और जिस पर भरोसा करता है। ऐसे मामलों में दोषी अक्सर एक माता-पिता या अन्य रिश्तेदार हो सकते हैं। अगर आपको बाल शोषण पर संदेह है, तो उसे रोकने और बच्चे की मदद करन के लिए उचित अधिकारियों को इसकी सूचना दें।

शारीरिक शोषण के संकेत और लक्षण –

    • अनचाहे चोट लगना, जैसे- जलना, खरोंच लगना या फ्रैक्चर होना
    • चोट जिसके कारण बच्चे को न पता हो या जिसकी वजह सामान्य न हो
    • अनुपचारित चिकित्सक या दांत की समस्याएं

भावनात्मक शोषण के संकेत और लक्षण –

    • अनुचित या भावनात्मक विकास में देरी
    • आत्मविश्वास या आत्मसम्मान की कमी महसूस करना
    • डिप्रेशन मे रहना।
    • बिना किसी चिकित्सकीय कारण के सिरदर्द या पेट में दर्द
    • स्कूल जाने से मना करना या बस में चढ़ने से मना करना
    • मायूस रहना
    • स्कूल के प्रदर्शन में कमी या स्कूल में रुचि की कमी

बाल उपेक्षा के संकेत और लक्षण –

    • वजन या शारीरिक विकास में कमी
    • खराब स्वच्छता
    • शारीरिक जरूरतों को पूरा करने के लिए कपड़ों की कमी या आपूर्ति
    • बिना अनुमति के भोजन या पैसा लेना
    • स्कूल में उपस्थिति का खराब रिकॉर्ड
    • मनोवैज्ञानिक समस्याएं
    • उदास रहना

माता-पिता का व्यवहार के लक्षण –

    • बच्चे के लिए चिंतित होने का दिखावा करना
    • बच्चे में शारीरिक या भावनात्मक संकट को पहचानने में असमर्थ
    • घर या स्कूल में होने वाली समस्याओं को नजरअंदाज करना
    • हर छोटी-मोटी बात पर बच्चे को डाटना-मारना
    • बच्चे के लिए नकारात्मक शब्दों का इस्तेमाल करना या उसे बेकार बताना
    • बच्चे से अपेक्षा करना
    • दूसरों के बच्चों से तुलना करना
    • कठोर शारीरिक अनुशासन

अधिकांश बाल स्वास्थ्य विशेषज्ञ किसी भी रूप में हिंसा के उपयोग की निंदा करते हैं, लेकिन कुछ लोग अभी भी बच्चे की गलती पर उसके साथ मारपीट करते हैं। कोई भी शारीरिक दंड बच्चे पर भावनात्मक प्रभाव डाल सकता है।

बाल शोषण के कारण क्या क्या हैं?(Due to child abuse)

बाल शोषण के कई कारण हो सकते हैं। जिसमें पारिवारिक और सामाजिक दोनों कारण शामिल हो सकते हैं। बच्चे के साथ यौन दुर्व्यवहार और उपेक्षा उन परिवारों में सबसे अधिक होती है जो आर्थिक या सामाजिक तौर पर दबाव में होते हैं।

  • गरीबी का होना
  • शिक्षा का अभाव नही होने के कारण
  • गंभीर वैवाहिक समस्याएं
  • बार-बार रहने की जगह में परिवर्तन करने के कारण
  • परिवार के सदस्यों के बीच हिंसा
  • बहुत बड़ा परिवार होने के कारण विशेष देखभाल का अभाव
  • अकेलापन और सामाजिक अलगाव
  • बेरोजगारी होने के कारण से
  • रहने के लिए घर न होना का कारण
  • बच्चे से पिता की बहुत ज्यादा उम्मीदें, जो बच्चा पूरी नहीं कर सकता है
  • बच्चे के साथ माता-पिता का दुर्व्यवहार
  • बच्चों को पालने में उचित ज्ञान और कौशल की कमी
  • कम आत्मसम्मान और आत्मविश्वास
  • डिप्रेशन मे होने के कारण से
  • शराब या नशीली दवाओं का दुरुपयोग
  • मानसिक या शारीरिक बीमारी
  • काम का दबाव होना

बाल शोषण के जोखिम खतरे क्या है?

  • बच्चे के साथ पारिवारिक तौर पर शोषण या किसी तरह का मतभेद
  • शारीरिक या मानसिक बीमारी, जैसे- डिप्रेशन या पोस्ट-ट्रॉमैटिक स्ट्रेस डिसऑर्डर (PTSD)
  • पारिवारिक संकट या तनाव, जिसमें घरेलू हिंसा और अन्य वैवाहिक समस्याएं शामिल हो, एकल माता-पिता
  • परिवार में एक बच्चा जो शारीरिक रूप से अक्षम हो
  • वित्तीय तनाव या बेरोजगारी
  • सामाजिक या विस्तारित पारिवारिक अलगाव
  • बाल विकास और पेरेंटिंग कौशल की खराब समझ
  • शराब का सेवन आदि हो सकते है

बाल शोषण का निदान कैसे किया जाता सकता है?

ऐसे बच्चों के उपचार के लिए डॉक्टर सबसे पहले उनका सामान्य शारीरिक परीक्षण करते हैं। डॉक्टर बच्चे के स्वास्थ्य से जुड़ी सभी जानकारी इक्ठ्ठा करते हैं और उसके माता-पिता या देखभाल करने वाले से बच्चे की स्थिति के बारे में सवाल पूछते हैं।
अगर बच्चा बात कर सकता है, तो डॉक्टर बच्चे से अकेले में बात करेंगे। साथ ही, कुछ मामलों में डॉक्टर कानूनी तौर पर जांच कर सकते हैंः

    • बच्चे की उम्र के हिसाब से बच्चे को लगी चोट सामान्य या प्राकृतिक नहीं है।
    • बच्चे की स्थिति के बारे में माता-पिता या उसकी देखभाल करने वाले के पास सही जानकारी न हो।
    • माता-पिता या देखभाल करने वाले का किसी भी चोट के लगने से इंकार करना।
    • मेडिकल रिकॉर्ड के तौर पर बच्चे को बार-बार एक ही तरह के चोट लगना।

बाल शोषण के लिए बने कानून [child harassment act in India]

हमारे देश में महिलाओं के शोषण के लिए बहुत से कानून बनाये जा चुके थे, लेकिन बच्चे जो कि 18 से कम उम्र के हैं उनके शोषण के खिलाफ देश में कोई बड़ा कानून नहीं था। बहुत सी वारदातों और घटनाओं से स्पष्ट हुआ, कि बाल शोषण अपराध भी दिन प्रतिदिन बढ़ता ही जा रहा है और उनके पीछे ज़्यादातर करीबी लोगो का होना पाया गया हैं, इस कारण 2012 में बाल शोषण के खिलाफ बड़ा कानून बनाया गया, जिसे प्रोटेक्टशन ऑफ़ चिल्ड्रन अगेन्स्ट सेक्सुयल ऑफेंस बिल 2011 के रूप में सदन में पारित किया गया। बाद में इसे 22 मई 2012 को एक एक्ट बनाया गया।

बाल शोषण पर अनमोल वचन (Child Harassment Quotes)

  1. बाल शोषण अशिक्षित समाज की देन नहीं अपितु पढ़े लिखे मॉडर्न समाज की देन हैं।
  2. फूलों को निहारा जाता हैं, उसे कुचलना अपराध हैं।
  3. स्वस्थ समाज स्वस्थ बच्चों से हैं, बाल शोषण बच्चो को मानसिक रोगी बना रहा हैं, भविष्य के लिये इस घृणित अपराध को रोकना हमारा कर्तव्य हैं।
  4. बचपन जितना बेहतर होगा भविष्य उतना ही उज्जवल बनेगा अतः बाल शोषण जैसे अपराध बच्चो की नींव को कमजोर करते हैं।
  5. बेहतर समाज बेहतर बच्चो से बनता हैं अतः उन्हे स्वस्थ बचपन देना बुजुर्गों का कर्तव्य हैं।

बाल शोषण रोकने के उपाय [Child Harassment Solution]

  • बाल शोषण को रोकने के लिए जरूरी हैं कि बच्चों को सही और गलत का ज्ञान दिया जाए। उन्हें इस विषय में खुलकर बात की जानी चाहिए, ताकि वे इस शोषण को समझ सकें और अपनों से कह सकें।
  • बच्चो को यह ज्ञान होना बहुत आवश्यक है, कि वह अपने और पराये के अंतर को समझ सके। वैसे यह बहुत मुश्किल हैं क्यूंकी वयस्क भी कौन कौन अपना पराया का हिसाब सही नहीं कर सकता, तो बच्चे तो ना समझ होते हैं। पर फिर भी उन्हे कुछ हद तक ज्ञान देना आवश्यक हैं।
  • बच्चो को शारीरक शोषण को समझने के लिए अच्छे और बुरे टच को महसूस करने का ज्ञान दिया जाना आवश्यक है।
  • बाल शोषण से निपटने के लिए आज कल कई तरह की कक्षाओं भी चलाई जा रही हैं जहां बच्चो को इस बात की समझ दी जाती हैं और माता-पिता को भी सिखाया जाता हैं कि कैसे बच्चों को खेल -खेल में यह सब सिखाये जाते हैं। इसलिए बिना शर्म किए ऐसे वर्गों का हिस्सा बने।
  • बच्चो की बातों को छिपाने के बजाय उसका खुलकर विरोध करे, इससे आपका बच्चा तो विश्वास महसूस करेगा ही समाज का हर व्यक्ति इससे संतुष्ट होगा और आपराधिक अपराध करने से पहले कई बार सोचेगा।

बाल शोषण पर कविता (Child Harassment Poem)

मासूम की मासूमियत से भी खेल रही है दुनिया,
जंगली जानवर की तरह झंझोड़ रही है दुनिया |
इंसानियत पर कोई विश्वास नहीं रह गया,
आज आदीमानव से ज्यादा विचारहीन मानव हो गया |
किसे सिखाएं इस पढ़ी लिखी दुनियां में,
जब अपना ही लगा गया दाग मासूम के दामन में |
कोई किसी का नहीं रह गया यह कलयुग का दौर है,
संत महापुरुष में भी छिपा यहाँ चौर है ||

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